Kaushambi:झोपडी मे कैद जिंदगी को मदद की आस,झोपडी मे लाकडाउन का कर रहे पालन

कौशाम्बी:पश्चिम शरीरा …लाकडाउन का पालन करते हुए झोपडी मे कैद परिवार राहत की आश लगाए बैठा है |इनकी जिंदगी की जंग इनके हौसले की कायल है |रोज कमाना रोज खाना इनकी जिंदगी का मकसद बन गया है |एक छत भी इन्हें नसीब नही होती |इनके बैलगाड़ी का घूमता पहिया रोजी रोटी का साम्राज्य है |पश्चिम शरीरा कस्बे मे पन्नी की झोपडी डालकर दो लोहगढिया परिवार पडा है |इनका मुख्य पेसा फावडा कुल्हाड़ी सब्बर ,हसिया ,कुदाल बनाकर बेचना या लोहा उपलब्ध कराने पर लोगो का सामान बनाकर मजदूरी लेना है उसी कमाई से जीवन यापन करते है |अब जब कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए देश मे लाकडाउन है तो इनके सामने परिवार के भरण पोषण करने की समस्या पैदा हो गई | नारायण लोहगढ़िया ने बताया कि साहब कह गए कि झोपडी मे ही रहना बाहर नही निकला खाने पीने की व्यवस्था की जाएगी |हम लोग झोपडी मे पडे रहते है |मेरे परिवार मे पांच लोग है दो लडके और एक लडका है |उसने बताया कि कोटेदार ने पच्चीस किलो गेहूँ दिया था | उसी से काम चल रहा है लेकिन पैसे न होने के कारण दाल ,सब्जी नही खरीद सकते |एक व्यक्ति आलू दे गया उसे उबाल खा लेते है |चावल उबाल कर खाना पडता है |लेकिन अब खाने की सामग्री खतम हो रही है पैसे भी नही है अगर मदद न मिली तो भूखो मरना पड सकता है |इसी सरदार लोहगढ़िया का परिवार भी सरकार से मदद की आस लाए है |इसके परिवार मे पत्नी और दो बेटिया है |चार लोगों के भोजन की व्यवस्था करनी पडती है |इसे दस किलो गेहूँ कोटे मिला था |जो समाप्त हो चुका है पैसे भी नही है |इस स्थित मे किसी के मदद की इन्हें आवश्यकता है | इन्होंने बताया कि ग्राम प्रधान पश्चिमशरीरा ने सौ ,सौ रुपये दोनो परिवार को दिए है |मदद पर जिंदगी टिकी है।