लाकडाउन में दिनदहाड़े गैस एजेंसी से तीन लाख की लूट

कुशीनगर। कसया थाना क्षेत्र में गैस एजेंसी के इंचार्ज से तीन लाख की लूट कर लाकडाउन में बदमाश आसानी से निकल गए। लाकडाउन के बीच जहा चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात हैं वही मंगलवार को 1:30 बजे कसया थाना क्षेत्र के पड़रौना – कसया बाईपास पर स्थित क्रांति गैस एजेंसी से तीन लाख रुपये की लूट की सूचना सर्वाजनिक होते ही सुनने वाले का कान खड़े हो गया। सबके जुबा पर एक ही बात थी कि लाकडाउन में दवा लेने बाजार करने जाने पर कई स्थानों पर पुलिस का सामना करना पड़ रहा पूछताछ हो रहा हैं। यहां तक कि लांठिया भी खानी पड़ रही हैं तो इतनी आसानी से तीन लाख लेकर लूटरे कैसे चपत हो गए। इससे स्पष्ट हो रहा है कि पुुुलिसक्षेत्र से नदारत थी। अगर पुलिस की निष्क्रियता नहीरहती तो लाकडाउन में पुलिस आदित्या एवं शिवम होटल के पास अन्य दिनों के तरह आज भी तैनात रहती और निश्चित ही इस घटना पर पुलिस सफलता प्राप्त कर ली होती हैं। घटना के बाद एजेंसी पर पहुँची पुलिस जानकारी ली। गैस एजेंसी के वितरक ने थानाध्यक्ष कसया को तहरीर देकर बताया है कि मंगलवार 1:30 बजे 368 गैस सिलेंडर के वितरण का पैसा गोदाम इंचार्ज नेसार द्वारा मिलान किया जा रहा था तभी एक बाइक से तीन बदमाश पहुँच कर इंचार्ज नेसार को धक्का देते हुए पैसा लेकर फरार हो गए । यह नहीं था कि इंचार्ज ने हिम्मत हारी बल्कि बदमाशों का पीछा किया लेकिन सफल नहीं हो पायाहालाकि पुलिस लाकडाउन के दृष्टिगत ही फील्ड में रहा होती तो इंचार्ज को बदमाशों को पकड़ने में कामयाबी मिली होती। कसया इंस्पेक्टर लाकडाउन को लेकर कितना सख्ती बरत रहे हैं कि थाने से 2 किलोमीटर पर ही लूट की घटना को बदमाश बड़ी दृढ़ता से अंजाम देकर पुलिस को चुनौती दे रहे हैं। लाकडाउन में कसया पुलिस की लापरवाही का पोल खोलने के लिए लूट की यह घटना ही काफी हैं। मोबाईल पर किसी प्रकार की सूचना देना या लेना इंस्पेक्टर साहब के लिए मानो तो नियम विरुद्ध हैं यह जहा भी रहे हैं इस तरह की शिकायतें आती रही हैं। वही लाकडाउन में बदमाशों की यह वारदात कितना गंभीर हैं इसमें पुलिस की क्या लापरवाही हैं यह तो कप्तान साहब के कलम से ही तय होगा। फिलहाल इस बात को कहते सुना जा रहा है कि इंस्पेक्टर कसया की फील्ड की कार्यशैली उचित नहीं हैं। अब लोगों द्वारा इस बात को क्यों कहा जा रहा यह तो नहीं पता लेकिन इतना जरूर पता हैं कि साहब थाने को अपना घर तो बना ही लिए हैं तभी तो ज्यादा तर आवास में समय गुजार रहे हैं। और सरकारी सीओजी नंबर भी इनका पर्सनल नंबर बन कर रह गया हैं क्योंकि लोगों का नंबर ब्लाक करने से भी नहीं चूक रहे हैं। क्योंकि इन्हें पता हैं कि हमारे विरुद्ध जिम्मेदाराना अधिकारी कार्यवाई नही कर पाएंगे। इस संबंध में जब थानाध्यक्ष अनुज कुमार सिंह से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो कुछ भी बताने से इंकार कर दिए।