You are currently viewing जनसेवा हेतु बाबा उमाकान्त जी महाराज द्वारा निःशुल्क 10 एम्बुलेंस, ऑक्सीजन प्लांट और हॉस्पिटल

जनसेवा हेतु बाबा उमाकान्त जी महाराज द्वारा निःशुल्क 10 एम्बुलेंस, ऑक्सीजन प्लांट और हॉस्पिटल

देश-विदेश में आध्यत्मवाद की अलख जगाने वाले उज्जैन के पूज्य सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 29 जून 2021को भक्तों को सन्देश दिया कि प्रेमियों आपकी मेहनत और सहयोग से पूरे देश-विदेश मे संगतें निशुल्क भोजन भंडारे चला रही है। उज्जैन आश्रम परिसर में बने इस 5 मंजिला अस्पताल में तो कैश काउंटर ही नहीं बनवाया गया। पिछले लॉकडाउन में तो दिल खोल करके खिलाया गया। अपने पास जो गल्ला था, सब बटवाया गया और खिलाया गया। आप समझो फिर ऐसी दया हुई कि भंडार फिर भर गया, कमी नहीं हुई किसी चीज की, और बढ़ गया। इस वर्ष भी प्रेमियों ने खूब खिलाया। फिर सोचा गया कि ऑक्सीजन प्लांट लगवा दिया जाए। ऑक्सीजन प्लांट उज्जैन में लग गया। कल हमने बात किया था पता चला बिल्कुल तैयार है। आज-कल में चालू हो जाए तो आप लोग जो बाहर से एंबुलेंस लेने के लिए आए हो आपके सामने अगर चालू हो जाए आप लोग देख कर जाओ।

प्रेमियों सभी एम्बुलेंस ले जाओ और निःशुल्क करो गरीबो असहायों की सेवा

महाराज जी कहा कि ये देखा गया कि एंबुलेंस की दिक्कत है तो एंबुलेंस के लिए आर्डर कर दिया गया। लेकिन ऑक्सीजन का उस समय सामान नहीं मिला। सब जगह हाथ उठा दिए। लोगों को सामान ही नहीं मिल रहा है। दूसरे देश से मंगवना पड़ेगा। समय लग गया, लॉक डाउन लग गया। बहुत तरह की दिक्कतें पैदा हो गई। एंबुलेंस की तैयारी में भी यही बताया गया की समान नहीं मिल रहा है। समय बढ़ गया। अभी मिली हैं और आप लोगों को खबर पहुंचाई गई है। आप लोग लेने के लिए इसको जो आए हो आप एंबुलेंस ले जाओ, सेवा भाव रखकर के निस्वार्थ इसको चलाओ। कोई शुल्क मत लेना। अगर कोई एंबुलेंस बुलाता है तो चालक उस दिन उनका चाय भी मत पियो। व्यवहार आपका बन जाए, आपका प्रेम उनसे हो जाए, बाद में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन अभी उनसे कुछ नहीं लेना है, सेवा भाव से सेवा करो।

नियमों का पालन करते हुए आगे बढ़ो फिर इसे और बढ़ाया जाएगा

अभी 10 एंबुलेंस मिली हैं। यह अभी तो कुछ भी नहीं है। अभी तो इसका कई गुना जरूरत है और ऐसे जगहों पर जरूरत है कि जहां कोई प्राइवेट या सरकारी एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती है। लोग जाना नहीं पसंद करते हैं वहां जरूरत है। गरीबों-असहायों की मदद करने की जरूरत है। तो इससे तो कुछ होने वाला है नहीं लेकिन संख्या तभी बढ़ाई जाएगी जब आप इसको चला ले जाओगे सेवा करने लग जाओगे, जब आपको अनुभव हो जाएगा तो एक की जगह कई चल सकती हैं।
जब आपकी व्यवस्था बन जाएगी, निराशा-हताशा नहीं होगी, आप जब नियम-कानून के अंतर्गत चलोगे, आगे बढ़ोगे तो और बढ़ावा दिया जाएगा।

निस्स्वार्थ सेवा से शारीरिक तकलीफें दूर होती हैं

यह सेवा का एक अच्छा माध्यम है। जिस तरह से आप लोगों को रोटी खिलाते हो, देश में सैकड़ों भंडारे चल रहे हैं। तीर्थ स्थानों पर, दार्शनिक स्थानों पर, ऐसे देश-विदेश में प्रेमियों जो आप भंडारा चला रहे हो, वह शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कर रहे हो। और यह स्वस्थ रखने का एक माध्यम है। इसलिए इसको चलाया जाएगा। और भी बढ़ाया जाएगा लेकिन जब आपकी व्यवस्था बन जाएगी। एक नियम आप बना लोगे, सरकार के नियम के अंतर्गत काम करोगे, नियम-कानून का पालन करोगे, कोई दिक्कत परेशानी आगे जब नहीं आएगी तब इसको और बढ़ावा दिया जाएगा।