जानिए भक्त क्यो मनाते है 23 मार्च को मुक्ति दिवस-बाबा उमाकान्त जी महाराज

22.03.2021,उज्जैन म. प्र

जानिए भक्त क्यो मनाते है 23 मार्च को मुक्ति दिवस-बाबा उमाकान्त जी महाराज

देश और दुनिया को शाकाहार और जीव दया की सीख देने वाले उज्जैन के पूज्य सन्त और बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी बाबा उमाकान्त जी महाराज ने सतसंग में बताया कि प्रेमियों द्वारा 23 मार्च को मुक्ति दिवस के रूप में क्यों मनाया जाता है।

उस समय जो शासन सत्ता में थे, उन्होंने 21 महीने के लिये गुरु महाराज को जेल भेज दिया था

महाराज जी ने बताया कि पहले इमरजेंसी लगी थी। गुरु महाराज को जेल जाना पड़ा था। उस समय जो शासन सत्ता में थे उन्होंने गुरु महाराज को जेल भेज दिया और बेड़ी-हथकड़ी तक लगा दी थी। और 21 महीने गुरु महाराज को जेल में रहना पड़ा। अब जेल कराने वालों को यह मालूम नहीं था कि गुरु प्रेमियों के कर्मों को काट रहे हैं, प्रेमियों की तकलीफों को दूर कर रहे हैं।

वृक्ष कबहुं न फल भखै, नदी न संचय नीर।
परमारथ के कारने, संतन धरा शरीर।।

जैसे पेड़ अपना फल स्वयं नहीं खाता है, नदी अपना पानी स्वयं नहीं पीती है, ऐसे ही सन्त होते हैं।

*जो कोई कहा सन्त हम चीन्हा।
तुलसी हाथ कान धर लीन्हा।।

लेकिन सन्तों को पहचानना इतना आसान नहीं है। लेकिन फिर भी वेश की पूजा होती है। वेश का सम्मान होता है। अगर यह लोग वेश का सम्मान किए होते, अगर इसी बात को देखे होते कि लोग इनसे क्यों जुड़ रहे हैं? इनको क्या मिल रहा है। इसी बात पर रिसर्च किए होते तो गुरु महाराज को जेल ना भेजते।

प्रेमियो के लिये गुरु महाराज ने तकलीफों को झेला

महाराज जी ने कहा कि वह सोचे कि इनको दबा देंगे, इनको बंद कर देंगे और फिर इसी तरह से हुकूमत हम करते रहेंगे, जो चाहेंगे वही करेंगे। लेकिन ऐसा तो कभी इतिहास में हुआ ही नहीं।
लगता है इतिहास तो उनको कोई पढ़ाया नहीं, बताया ही नहीं। चलो जो हो गया, सो हो गया। गुरु महाराज ने झेला तकलीफों को। किसकी? प्रेमियों की तकलीफों को झेला। और उसके बाद 23 मार्च को जेल से बाहर आए थे। तब से बराबर प्रेमी लोग मुक्ति-दिवस मनाते हैं, झंडा फहराते हैं और व्रत रहते हैं। कोई-कोई नाम ध्वनि भी करते हैं और कोई ध्यान-भजन भी करते हैं। सतसंग के भी आयोजन छोटे-मोटे अपनी जगह-जगह पर प्रेमी करते हैं, ऐसे मनाते हैं।

प्रेमियो के लिये मुक्ति-दिवस त्योंहार का दिन है

यह जो मुक्ति दिवस का दिन है, प्रेमियों के लिए, त्यौहार का दिन हैं। जैसे राम जब जंगल से अयोध्या आये थे, रावण को मारकर करके तब दीपावली मनाई गई थी, दिया जलाया गया था। ऐसे ही प्रेमी खुशी में त्यौहार मनाते हैं। तो 23 मार्च को मुक्ति-दिवस का दिन है। गुरु महाराज के नाम का आश्रम उज्जैन में है।