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‘दीनबन्धु ऐसा मत करना’ भक्ति काव्य से निवेदित—

होगा समाधान पीड़ा का,
ईश्वर के घर देर नहीं हैं।
देर अगर हो जाये लेकिन,
उसके घर अंधेर नहीं हैं।
पीड़ा को हँस-हँस सह लेना,
जीवन की सच्चाई हैं।
भाग्यवान वह जिसके घर में,
पीड़ा रानी आई हैं।
मैं, पीड़ा का राजकुँवर हूँ,
पीड़ा मेरी रानी हैं।
जिसे नहीं आँखों से देखा,
वह तस्वीर बनानी हैं।
पीड़ा के ही बाद हमेशा,
आता सुख का दिव्य प्रभात।
रात सुनिश्चित हैं आएगी,
शंकरजी’ दिन के पश्चात।
शंकर जी सिंह।।।