प्रेमियों जिस गौ शाला में गायों के भोजन की व्यवस्था कमज़ोर है, वहाँ उनके भूसे की व्यवस्था करवा दो

जयगुरुदेव
उज्जैन, मध्य प्रदेश

प्रेमियों जिस गौ शाला में गायों के भोजन की व्यवस्था कमज़ोर है, वहाँ उनके भूसे की व्यवस्था करवा दो

वक्त के कामिल मुर्शिद आला फकीर सभी जीवों के निजात का रास्ता बताने वाले वर्तमान के पूरे सन्त सतगुरु बाबा उमाकान्त जी महाराज जी ने 30 नवम्बर 2020 को अपने उज्जैन आश्रम से भक्तों को आदेश दिया कि प्रेमियों! अब तो लोग गाय पालना बंद कर दिए। पहले तो दरवाजे-दरवाजे गाय होती थी। गौमाता के शरीर से जो गन्ध निकलती थी, सांस लेती थी, उनके गोबर से, उनके मूत्र से बहुत सी बीमारियां लोगों के निकल जाती थी। लेकिन सब लोग अब तो नहीं पाल सकते हैं। आज के मशीन के युग में, दौड़-धूप के युग में, जनसंख्या बढ़ने के कारण सब लोग अपने घर में नहीं पाल सकते।

प्रेमियों! जिन गौशालाओं में हालत खराब है, वहां चारा-भूसा डलवा दो

महाराज जी ने बताया कि लोगों ने जगह-जगह पर ऐसी व्यवस्था बना लिया, व्यक्तिगत लोगों ने, कुछ सरकार ने की गौशाला में खुलवा दी। तो अब गौशाला तो खुल गई। अब किस भाव से लोगों ने खोला, दूध पीने के भाव से, कि दूध बांटने के भाव से, कि दूध बेचने के भाव से, कि सरकार से अनुदान लेने के भाव से, किसी भी तरीके से – हम तो इस पर विश्लेषण नहीं करना चाहते हैं। लेकिन यह जरूर कहना चाहते हैं जिन गौशालाओं में हालत खराब है गऊओं की, उनको चारा नहीं मिल पा रहा है, वह किसी तरह से जी रही हैं – उन गौशालाओं में आप लोग चारा दे दो। एक अभियान यह चला दो।

प्रेमियों! पहले खुद करो फिर दूसरों को कहने के हकदार बनोगे

महाराज जी ने कहा कि देखो! कहते हैं पहले खुद करो फिर दूसरे से कहने के हकदार बनोगे। सबसे पहले जब लॉकडाउन लगा था तो हमने अपने उज्जैन आश्रम से घोषणा की थी कि इतने लाख लोगों को यहां से भोजन दिया जाएगा तो प्रेमी भी जगह-जगह खिलाने लग गए, सरकारें खिलाने लग गई, जगह-जगह संस्थाएं खिलाने लग गई। हम कहने के हकदार भी हुए जब हमने खुद किया।

प्रेमियों! जहां पर गाय कमजोर हैं, वहां पर भूसा-चारा डलवाना शुरू कर दो

महाराज जी ने बताया कि यहीं से हमने प्रेमियों से कहा, आश्रम के प्रेमियों से, की गौशाला में भूसा डलवाना शुरू कर दो प्रेमियों। तो डलना शुरू हो गया। अब देख लो समझ लो, जो गौशाला में गाय कमजोर हैं, जहां पर जरूरत है भूसा की, चारा की, आपसी सहयोग से आप इकट्ठा करके वहां डलवा दो रोज-रोज। वहां बनाकर नहीं खिलाना है न रोज-रोज आप उनकी सेवा करने जा सकते हो। तो सेवा करने की व्यवस्था तो उन लोगों ने बना रखा है, सरकार भी अनुदान देती है। चल तो सब जगह रहा है लेकिन कहीं-कहीं चारा-भूसा की दिक्कत है, जहां पर गाय कमजोर हैं ।
देखो! जानवर रखो तो उनकी सेवा करो। कमजोर नहीं होना चाहिए। आदमी पाल तो लेता है जानवरों को, पाल लेता है कुत्ता, बिल्ली, औरत सब पाल लेता है, उन पर ध्यान नहीं देता। ध्यान दो जैसे अपने बच्चों को खिलाते हो, वैसे उनको भी, उनका भी ध्यान रखो।

प्रेमियों! अब गायों को भी खिलाओ, उनको भूखा मत मरने दो

महाराज जी बताया कि किन परिस्थितियों में वह ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। उस पर तो आपको जाना नहीं है। जहां पर देखो कमजोर गाय है, जानवर है, आप संगत के जो लोग हो, चाहे जिस गांव में हो, शहर में हो या मोहल्ले में है, आप नाम दानी हो, आप सत्संगी हो, आप मिलकर के सब लोग चारा डलवा दो। अब गायों को भी खिलाओ। अब उनको भी भूखा मत मरने दो प्रेमियों! इन सब का आपको लाभ मिल जाएगा, फल मिल जाएगा।