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कौशाम्बेश्वर संकट मोचन आश्रम में महिलाओं ने की वट बृक्ष की पूजा

आर पी यादव ब्यूरो चीफ
यू पी फाइट टाइम्स

बारा कौशाम्बी मन्दिर के संरक्षक राजू केशरवानी ने बताया कि आस्था का केंद्र बना कौशाम्बेस्वर संकट मोचन आश्रम में भक्तों की आस्था के साथ मन्नत पूरा होता है और यहां आज अखंड सौभाग्य प्राप्ति के लिए वट सावित्री व्रत हर साल ज्येष्ठ अमावस्या के दिन रखा जाता है।बुधवार एवं गुरुवार को वट सावित्री व्रत को है इस अवसर में कौशाम्बेस्वर संकट मोचन आश्रम जोटका कौशाम्बी में हिन्दू धर्म कि महिलाओ ने ब्रत कर पूजा पाठ किया इस व्रत का खास महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि ज्येष्ठ अमावस्या के दिन ही सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण बचाए थे। इसलिए वट सावित्री व्रत को विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए रखती हैं। विवाहित महिलाएं इस व्रत को विधि-विधान के साथ रखती हैं। इसके लिए विशेष पूजा सामग्री का ध्यान रखा जाता है। वैसे तो अमावस्या तिथि ही अपने आप में महत्वपूर्ण तिथि होती है। लेकिन ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनि जयंती भी मनाई जाती है। इसके अलावा इस साल वट सावित्री व्रत के दिन सूर्यग्रहण भी लग रहा है। हालांकि यह सूर्यग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इस कारण यहां पर इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। आइए जानते हैं वट सावित्री व्रत का पूजा मुहूर्त, व्रत सामग्री, व्रत विधि और महत्व।
वट सावित्री व्रत का महत्व
वट पूर्णिमा व्रत को सावित्री से जोड़ा गया है। वही सावित्री जिनका पौराणिक कथाओं में श्रेष्ठ स्थान है। कहा जाता है कि सावित्री अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस ले आईं थी। इस व्रत में महिलाएं सावित्री के समान अपने पति की दीर्घायु की कामना तीनों देवताओं से करती हैं ताकि उनके पति को सुख-समृद्धि, अच्छा स्वास्थ्य और दीर्घायु प्राप्त हो सके।
इस कारण होती है वट वृक्ष की पूजा
हिन्दू धर्म में वट वृक्ष को पूजनीय माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) तीनों देवों का वास होता है। इसलिए बरगद के पेड़ की आराधना करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।