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राम मंदिर जमीन खरीद घोटाले से जनता खुद को महसूस कर रही है ठगा- विवेकानंद पाठक

कांग्रेस के प्रदेश महासचिव ने उठाई मामले मे उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच कराए जाने की मांग

कौशाम्बी। पिछले दिनों अयोध्या के राम मंदिर मैं जमीन खरीद में हुए विवाद से अब जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है कि उनके दान दिए गए पैसे से भगवान के लिए घर के स्थान पर उससे घूसखोरों का घर भरने का काम किया जा रहा है। प्रदेश की जनता इस समय मामले में उच्च स्तरीय जांच चाहती है जिससे पूरे मामले में सच बाहर आ सके। उक्त बातें कांग्रेस के प्रदेश महासचिव विवेकानंद पाठक ने एक विज्ञप्ति जारी करते हुए कही।

विज्ञप्ति में उन्होंने मांग उठाते हुए कहा कि यह करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा मामला है। देश के बहुसंख्यक हिंदुओं की इससे आस्था जुड़ी हुई है। इसीलिए राममंदिर निर्माण के नाम पर देश भर से लोगों ने हजारों करोड़ रुपये ट्रस्ट को चंदे में दिए। अब उसी ट्रस्ट में उनके चंदे की धनराशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है। विवेकानंद ने इसके प्रमाण पेश करते हुए अयोध्या में हुई जमीन खरीद का मामला सामने रखा। बताया कि अयोध्या में गाटा संख्या 243, 244, 246 की जमीन जिसकी मालियत पांच करोड़ अस्सी लाख रुपये है, उसको दो करोड़ रुपये में कुसुम पाठक और हरीश पाठक से सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी ने खरीदा। इस जमीन खरीद में दो गवाह बने, एक अनिल मिश्र और दूसरे रिषिकेश उपाध्याय जो अयोध्या के मेयर हैं। पांच मिनट बाद ये जमीन रामजन्मभूमि ट्रस्ट ने साढ़े अट्ठारह करोड़ में खरीद ली। 17 करोड़ रुपये आरटीजीएस कर दिया गया। लगभग साढ़े पांच लाख रुपये प्रति सेकेंड की दर से जमीन का दाम बढ़ गया। प्रभु श्रीराम के नाम पर जिस तेजी से जमीन की कीमत बढ़ी वह अपने आप में रिकार्ड है। जो अनिल मिश्र और रिषिकेश तिवारी सुल्तान और रवि मोहन तिवारी की खरीद में गवाह थे, वही ट्रस्ट के बैनामे में भी गवाह बन गए। मैं समझता हूं आज उन करोड़ों भक्तों को ठेंस लगी होगी, जिन लोगों ने भगवान राम के मंदिर के निर्माण पर चंदा दिया। मंदिर निर्माण के नाम पर ट्रस्ट के पदाधिकारी करोड़ों का भ्रष्टाचार कर रहे हैं। यह मनी लांड्रिंग का मामला है। जो जमीन मंदिर ट्रस्ट ने खरीदी उसके एग्रीमेंट के लिए स्टांप पांच बजकर ग्यारह मिनट पर खरीदा गया और रवि मोहन तिवारी ने जो जमीन हरीश पाठक से खरीदी पांच बजकर बाइस मिनट पर खरीदा। आखिर ट्रस्ट ने स्टांप पहले ही कैसे खरीद लिया। किसी भी ट्रस्ट में जमीन खरीद के लिए बोर्ड की मीटिंग करके प्रस्ताव पास किया जाता है। ऐसे में सवाल है कि मात्र पांच मिनट में कैसे ट्रस्ट ने प्रस्ताव पास करके जमीन खरीद ली। 

कांग्रेस के प्रदेश महासचिव ने मामले की जांच माननीय उच्चतम न्यायालय की निगरानी में कराए जाने की मांग उठाते हुए कहा कि क्योंकि ट्रस्ट बनाने का निर्देश माननीय न्यायालय के द्वारा किया गया था। इसलिए जांच भी माननीय न्यायालय की निगरानी में होना चाहिए। उन्होंने कहा यह जांच अत्यंत आवश्यक है जिससे लोगों का विश्वास सच पर कायम रह सके।