महात्मा ऐसे वैद्य होते है जो आत्मा और शरीर दोनों की करते हैं बीमारी दूर-बाबा उमाकान्त जी महाराज

जय गुरु देव

दिनांक: 17 जून 2021
स्थान: बाबा उमाकान्त जी महाराज आश्रम, उज्जैन, म.प्र.

महात्मा ऐसे वैद्य होते है जो आत्मा और शरीर दोनों की करते हैं बीमारी दूर-बाबा उमाकान्त जी महाराज

परम् सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज, उज्जैन ने गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर दिनांक 09.07.2017 को यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम (jaigurudevukm) से सतसंग में संतो की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि यह तो बताया जाता है कि गर्मी-ठंडी का असर शरीर पर न पड़े। गर्मी आ जाएगी तो दस्त होने लगेगा और सर्दी आ जायेगी तो जुकाम-बुखार होने लगेगा। लेकिन बुखार उतरेगा कैसे? और दस्त कैसे रुकेगी? यह भी बताना जरूरी होता है। सतगुरु वैद्य होते हैं। वह जो अंदर की बीमारी है, जो जीवात्मा बीमार पड़ी हुई है उसे भी दवा दे करके स्वास्थ्य करते हैं और शरीर को भी स्वस्थ करते हैं जड़ी-बूटी बता कर के और रोग को हटा देते हैं। खाने-पीने की बदपरहेजी से जो रोग हो जाते हैं वह तो दवा से ठीक करवा देते हैं और जो कर्म रोग होते हैं उन्हें लोगों की सेवा और भजन के द्वारा कटवाते हैं।

प्रवचन तो बहुत होता है, बताते हैं कि स्वर्ग-नर्क है लेकिन गलती बन गई तो नर्क से बचोगे कैसे? यह बताना जरूरी है।

प्रवचन तो बहुत होता है। समझाते भी हैं लोग कि भाई स्वर्ग है, नर्क है। लेकिन गलती करोगे तो नर्क से बचोगे कैसे? नर्क से बचने का तरीका उनको खुद को नहीं मालूम है। जब खुद को नहीं मालूम है तो दूसरे को क्या बताएंगे? वह बताना जरूरी है।

सन्त अगर जीवों को कर्म हीन न करें तो जीव नर्क और 84 में चक्कर काटता रहेगा।

जीवों को अगर कर्म हीन नहीं किया जाएगा तो नर्क-चौरासी में चक्कर काटता रह जाएगा इसलिए उसकी सफाई बहुत जरूरी होती है। इससे सफाई हो जाएगी, कई जन्मों की सफाई हो जाएगी। जो आपको रास्ता बताया जा रहा है भजन-ध्यान-सिमरन करने का इससे।

शब्द के साथ अगर जुड़ जाओगे तो देवी-देवताओं का दर्शन जीते जी करने लग जाओगे।

वर्णात्मक नाम और ध्वन्यात्मक नाम अलग-अलग होता है। वर्णनात्मक नाम को मुंह से लिया जाता है और ध्वन्यात्मक नाम से सारा संसार बना, अंड-पिंड-ब्रह्मांड-देवी-देवता सब बने। शब्द के साथ यह नाम जुड़ा हुआ है तो इस नाम को जब याद करोगे और जो रूप बताया जाएगा उसे याद करोगे तो शब्द के साथ जुड़ जाओगे। शब्द के साथ ही ऊपरी लोकों में सैर करने लग जाओगे, देवी देवताओं का दर्शन करने लग जाओगे, अंड-पिंड-ब्रह्मांड लोकों में आने-जाने लग जाओगे।

सतपुरुष जो सबका मालिक है, उनके पास पहुंच जाओगे तो उन्हीं के तदरूप हो जाओगे।

सत्पुरुष जो सबका मालिक सबका सिरजनहार है, उसके पास आप पहुंच जाओगे। आपके ऊपर अगर ज्यादा दया हो गई तो उसी के तदरूप हो जाओगे। कहा गया है:
सतपुरुष की आरसी, संतन की ही देह।
लखना चाहो अलख को, इन्हीं में लख लेह।।
उस मालिक की पूरी पावर आप में आ सकती है।
जयगुरुदेव
परम् सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज आश्रम उज्जैन (म.प्र)भारत