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जय गुरु देव

23 जून 2021
उज्जैन, म.प्र.

बाहरी आंखों से जो कुछ भी देखते हो, इसमें उलझे रहना समय को है बेकार करना -बाबा उमाकान्त जी महाराज

जीते जी इसी मानव मंदिर में मुक्ति-मोक्ष का रास्ता बताने वाले वक्त के कामिल मुर्शिद आला फकीर, सभी जीवों के निजात का रास्ता बताने वाले वर्तमान के पूरे संत सतगुरु बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 12 अगस्त 2020 को बाबा उमाकान्त जी महाराज आश्रम, उज्जैन, म.प्र. में हुए और यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम (jaigurudevukm) पर प्रसारित सतसंग में प्रसंग के माध्यम से भक्तों को संदेश दिया कि वीर सिंह नाम का एक राजा था। कबीर साहब का शिष्य था। बहुत बढ़िया मकान बनाया। पहले नाम और काम के लिए बनवाते थे। उसमें सोते थे, आराम करते थे, आराम की सारी चीजों को मुहैया करते थे। उसने खूबसूरत इतना बनवाया कि लोग देखने के लिए जाते थे। देखने वालों की लाइन लगी हुई थी। कबीर साहब से प्रार्थना किया कि आप भी चलिए, वो नहीं जा रहे थे।

बिना प्रेम रीझै नही स्वामी नन्द किशोर।
राम-राम सब कोई कहै, ठग ठाकुर और चोर।।

कबीर साहब को प्रेम में जाना पड़ा। प्रेम को ठुकराते नहीं। प्रेम पैदा होना चाहिए। ऐसे मुंह से कहने से प्रेम नहीं पैदा होता। लेकिन जब मना कर देते हैं तो यह मन सोचता है कि क्यों मना कर दिया, हमारे कहने में कोई कमी रह गई। तब अंदर में प्रेम पैदा करता है और जब दीनता आती है तो सुनवाई हो जाती है।

जब सच्चे सन्त मिलते हैं तो बताते हैं कि ईंट-पत्थरों को घर तुम्हारा नहीं, तुम्हारा घर तो कही और है।

तो कबीर साहब चले गए। देखा, कुछ नहीं बोले। तो उनसे पूछा कि हमने महल बनाया, कैसा लगा आपको? वो बोले हम क्या बताएं कैसा लगा। यह महल तुम्हारा खँडहर हो जाएगा, खँडहर बना दिया तुमने, खँडहर कैसे बना दिया? बोला इतना सुंदर महल बना हुआ है; हां, सुंदर बना हुआ है लेकिन यह हमको तो खँडहर दिखाई पड़ रहा है, न तो यह महल रहेगा न तो इसमें रहने वाला रहेगा। तो राजा को यह बात अखर गई कि मैने इतना बढ़िया बनवाया रहने के लिए, मैं इसमें नहीं रहूंगा। बोला तो कुछ नहीं लेकिन पीछे-पीछे चला जानने के लिए।

इस परिवर्तनशील संसार की हर वस्तु ख़त्म होगी, इनमें उलझो मत

कबीर साहब प्रसंग सुनाते थे। उसमें सुनाया कि भाई यह निश्चित है कि शरीर खँडहर होगा, मकान खँडहर होगा, पेड़ सूखेंगे, धरती पर जितनी भी चीजें हैं, उनकी अवधि है। वह अवधि जब पूरी होगी तब वह चीज खत्म होगी। जैसे 12 घंटा दिन है तो रात आ जाएगी। रात का समय निश्चित है कि इतना समय पूरा होगा तो सवेरा होगा, दिन आ जाएगा। यह परिवर्तनशील संसार है। यहां हर चीज परिवर्तनशील है। यह सारी चीजें जो आप बाहरी आंखों से देखते हो सब परिवर्तनशील हैं और इसमें उलझे रहना समय को बेकार कर रहा है।