You are currently viewing प्रभु दर्शन और आत्मा के उद्धार के लिये पशु-पक्षियों को भी योनियों में भटकने के बाद मनुष्य शरीर में आना पड़ेगा

जय गुरु देव

1 जुलाई 2021
उज्जैन, मध्य प्रदेश

प्रभु दर्शन और आत्मा के उद्धार के लिये पशु-पक्षियों को भी योनियों में भटकने के बाद मनुष्य शरीर में आना पड़ेगा

जीते जी आत्मा को परमात्मा से मिलाने का सीधा और सरल मार्ग बताने वाले वर्तमान के पूरे सन्त सतगुरु बाबा उमाकांत जी महाराज ने 29 जून 2021 को अपने यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेयम के माध्यम से भक्तों को सन्देश दिया कि आप समझो प्रेमियों! भगवान को तो अपने-अपने तौर तरीके से ही सही पशु-पक्षी भी याद करते हैं जब उनको थोडा बहुत भी ज्ञान होता है। लेकिन आप भगवान को पा सकते हो, देख सकते हो, परमात्मा का दर्शन आप कर सकते हो। वे नहीं कर सकते। योनियों में भटकने के बाद मनुष्य शरीर में आना ही पड़ेगा प्रभु के दर्शन के लिए, अपनी आत्मा के उद्धार के लिए।

दुखों के इस संसार में भोगों में लिप्त होकर भगवान को ही भूल रहा इंसान

ये दुःखो के संसार में मनुष्य इस माया के देश में और भोगों में लिप्त होकर उस भगवान को ही भूल गया जो सब कुछ करते हैं, जिन्होंने दुनिया को बनाया है, जिन्होंने यह अनमोल शरीर दिया, देवी-देवता जिस मनुष्य शरीर मिलने के लिए तरसते रहते हैं, उन्हीं को इंसान भूल रहा है।

मनुष्य शरीर अनमोल है, दोबारा जल्दी मिलने वाला नहीं। समरथ गुरु की खोज करके अपना काम बना लो

यह जो शरीर है, यह बेशकीमती है। इसकी कोई कीमत नहीं लगा सकता। देखो जिन देश के लोगों को इस मनुष्य शरीर के बारे में जानकारी हो जाती हैं, जीव रक्षा का, मनुष्य के रक्षा का पूरा इंतजाम करते हैं और समझते हैं की एक भी जान किसी की जाने न पावे।

संयम-नियम अगर समझ में न आया तो भोगों में फसकर अपनी सांसो को खत्म कर दे रहा इंसान

आप समझो प्रेमियों बहुत से लोग न जानकारी में प्राण त्यागने के लिए मजबूर हो जाते हैं, शरीर छोड़ने के लिए मजबूर हो जाते हैं। जैसे देखो बहुत से लोग जवानी में, कम उम्र में ही दुनिया-संसार से चले जा रहे हैं। कहते हैं भोजन अगर समझ में आ जाए कि हम को क्या फायदा करेगा तो अन्न ही रक्षा करता है, शरीर को बचाता है। और अगर नहीं जानकारी है तो वह खाते-खाते आदमी अपनी उम्र को कम कर लेता है। दुनिया का यह जो भोग, दुनिया की यह चीजें जो बनाई गई, उसकी जानकारी अगर नहीं हो पाई, संयम-नियम अगर समझ में नहीं आया तो भोग में ही अपनी सांसे आदमी खत्म कर दे रहा है।

परमात्मा ने संतो को इसलिये भेजा कि लोग सत्संग में आते रहेंगे तो हर चीज की जानकारी होती रहेगी

यह सब जानकारी के लिये मनुष्य शरीर जिसने दिया, जानकारी कराने के लिए प्रभु ने जो यह शरीर दिया उसने संत महात्माओं को भेज दिया। उनका भी स्थान कायम कर दिया कि सतसंग में जाते रहो हर चीज की जानकारी देते रहो।