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व्यापरियों से बाबा उमाकान्त जी महाराज की अपील

दुकान-व्यापार में मुनाफा उतना ही लो जितना है जायज

बीना::घर-व्यापार में बरकत दिलाने के साथ ही लोगों को जीते जी मुक्ति-मोक्ष प्राप्त करने का रास्ता बताने वाले उज्जैन के पूज्य सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 30 जून 2021 को भक्तों को संदेश दिया देखो प्रेमियों आर्थिक कष्ट कब होता है? जब लोभ और लालच बढ़ती चली जाती है। तृष्णा की अग्नि है। तृष्णा मतलब क्या होता है लालच। जैसे अग्नि बढ़ती है, जैसे आग लग गई, बुझाओगे नहीं तो बढ़ती चली जाएगी।
यह मन जो माया का एजेंट है वकील है, यह फितरत पैदा करता रहता है, इच्छाओं को अंदर पैदा करता रहता है। वह इच्छाएं बढ़ती जाती हैं और आप अपने नियम से अलग हो जाते हो, लोग अपने नियम से अलग हो जाते हैं।
महाराज जी ने कहा कि जो बताया गया कि कम खाओ, जितना हजम कर सको। जैसे बताया गया है कि दाल में नमक खाओ, दाल ही न पी जाओ। एक उदाहरण है दाल में नमक चलता है। मुनाफा उतना ही लो जो जायज है। ज्यादा मुनाफा लेते हो जब बिजनेस कम हो जाता है। लोगों को मालूम हो जाता है कि दाम ज्यादा लेता है, माल घटिया देता है, मिलावट करने लग जाते हो तब दुकान हल्की पड़ जाती है तब चिल्लाते हो।

सन्तो की गृहस्थी उनसे जुड़े हुये लोग हैं, आप इस चीज को क्या समझोगे

यह बातें क्यों बतानी पड़ती हैं? आपकी गृहस्थी प्रेमियों कौन हैं? आपके बाल बच्चे रिश्तेदार। और साधु संतों और महात्माओं की गृहस्थी कौन होता है? जो उनसे जुड़े हुए लोग होते हैं। गृहस्थी किसी की भी हो, गृहस्थी पर ध्यान देना पड़ता है। गृहस्थ धर्म का पालन करना पड़ता है। समय-समय पर गुरु महाराज भी इन सब बातों को बताया करते थे। आपको यह सब बातें इसलिए बताई जा रही हैं कि इन सब बातों को आप याद करो। जब याद पहुंचती है, उससे तकलीफ होती है कि देखो ये इतने अनजान हैं, भोले हैं, ये समझ नहीं पा रहे हैं। यह जो कार्यकर्ता बने हुए हैं, अध्यक्ष मंत्री अपने को कहते हैं, मुखिया कहते हैं, यह बता नहीं पाते हैं। तकलीफ होती है, हर बात की तकलीफ होती है। इस चीज को आप क्या समझोगे क्योंकि आप उस काम को किए नहीं हो।

हविश कम रखो। लोग कहते है न बिजनेस चौपट हो गया। चौपट तो उसका हुआ जो कोरोना में चला गया

आपको इसलिए बता रहा हूं कि समझाओ लोगों को की हविश कम रखो। देखो कहते हैं घाटा हो गया, घाटा हो गया, बिजनेस चौपट हो गया। कैसे बिजनेस सब चौपट हो गया? कोरोना में चौपट। किसका हुआ? तुम्हारा क्या चौपट हुआ, चौपट तो उसका हुआ जो कोरोना में चला गया। लाख का करोड़, करोड़ का अरब खरब करता था और चार दिन भी नहीं लगा और उसका शरीर छूट गया। चौपट तो उसका हुआ, उसके बाल बच्चे गृहस्थी का हुआ, आपका क्या चौपट हुआ?

जो माँ के स्तन में बच्चा पैदा होने से पहले दूध भरता है उस मालिक पर विश्वास रखो

आप कहते हो धंधा बंद हुआ। देने वाले का लंबा हाथ है, जो पैदा होने से पहले मां के स्तन में दूध भर देता है, खिलाता है, सबको देता है। सबको मिलेगा तो आपको भी मिलेगा प्रेमियों। कुछ ऐसे भी होते हैं, कहते हैं घाटा हो गया। पूछो कहां घाटा हो गया तो कहते हैं बिजनेस में। गुरु महाराज के पास भी जाते थे लोग। हमसे कहते थे गुरु महाराज से दया दिलाओ, घाटा हो गया तो मैं कहता था कि यह बताओ मुनाफा में घाटा हुआ कि लागत में घाटा हुआ। नहीं समझ पाते थे।

दिल दु:खाकर लाया हुआ धन आत्म-हत्या के बराबर होता है

एक आदमी बोला घाटा हो गया। पूछा किस में घाटा हो गया? सेठ बोले तीन लाख का घाटा हो गया। उनके मामा सत्संगी थे तो सेठ भी आने-जाने लगे थे। तो उन्होंने पूछा तो बोले मामा घाटा हो गया। बोले कहीं घाटा नहीं हुआ। सेवा देना रहता तो कहते हैं घाटा हो गया बिजनेस में। तब पूछा तो बोले कि इस बार 2 लाख का मुनाफा हुआ लेकिन पिछली बार 5 लाख का फायदा हुआ था तो बोले 3 लाख का घाटा हुआ कि नहीं। जब ठग मिल गए, लालच दे दिया तो मुनाफे में घाटा होता है। जैसे लॉक डाउन हो गया या कोई तकलीफ हो गई, कारखाने पर काम करने वाले तो उस पर कमी आती है। क्यों घाटा हो गया नीयत भी खराब हो गई। मैं तो सीधा बोलता था, तब भी और अब भी बोलता हूं। नीयत खराब होती है तो भी बरकत बंद हो जाती है। धन का दुरुपयोग होने लगता है। इधर-उधर खर्चा होने लगता है। कहां खर्चा करता है? मुर्गा खाने में। उसको काटने में, कटवाने में, तकलीफ देने में, दिल दुखाने में, तो फलीभूत होता है। तकलीफदेह होता है। ये आपको समझने की जरूरत है।

लोभ लालच में ज्यादा मत पड़ो। कर्तव्य का पालन करो और गुरु की मौज में रहो

प्रेमियों लोभ-लालच में ज्यादा नहीं पड़ने का। लोगों को समझाओ, ज्यादा लोभ लालच में मत पड़ो, कर्तव्य का पालन करो और गुरु की मौज में रहो। प्रभु को बराबर याद करते रहो तो दिक्कत नहीं आएगी। आदमी जब समझता है कि मैं ही कर लूंगा, मेरे ही करने से होगा तो ढीला कर देते है। जब गुरु पर, प्रभु पर छोड़ देते हैं और कर्म को करते जाते हैं, उसमें आलस्य नहीं करते हैं तब वह मदद करता रहता है। सीधे मदद करने के लिए नहीं आता है, माध्यम बना देता है। कभी आकर बुद्धि देता है, कभी प्रेरणा दे देता है कि काम बिगड़ जाएगा जल्दी जाओ उठकर तो हर तरह से मदद करता है।