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जय गुरु देव

28.2.2021
पटना, बिहार

गुरु का स्थान सभी जगह सर्वोपरि है, वोही लोक-परलोक दोनों बनाते हैं

सतपुरुष के साक्षात अवतार, इस समय के जीते जागते मनुष्य शरीर मे मौजूद, सभी जीवों को उनकी सभी तरह की तकलीफों में आराम मिलने का रास्ता बताने वाले और मृत्यु से पूर्व मुक्ति-मोक्ष प्राप्त करने का रास्ता बताने वाले उज्जैन के पूरे सन्त सतगुरु बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 28 फरवरी 2021 को पटना, बिहार में आयोजित व यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम (Jaigurudev UKM) पर प्रसारित लाइव सतसंग में भक्तों को गुरु की महिमा समझाते हुए कहा कि चेतन से चेतन की पूजा करने से ही भगवान को प्राप्त किया जा सकता है।

जड़ की परिभाषा क्या है

तस्वीर क्या है? मूर्ति क्या है? यह समाधि क्या है? यह मंदिर-मस्जिद-गुरुद्वारा क्या है? यह है जड़। जीवात्मा चेतन है। जड़ किसको कहते हैं जो एक जगह से दूसरी जगह आ जा ना सके। कोई उठा कर ले जाए, कैसे भी ले जाए तब वह जाता है तब वह खिसक सकता है।

चेतन की परिभाषा क्या है

चेतन किसको कहते हैं? बगैर किसी के ले जाए हुए खुद चले, वह होता है चेतन। जीवात्मा चेतन है। चेतन से चेतन की पूजा जब करते हैं तब वह चेतन मिलता है।

जड़ की पूजा के लाभ सीमित हैं

मूर्ति, फोटो की पूजा कोई भले कर ले, मत्था पटक दे मिट्टी पत्थर के ऊपर लेकिन मुक्ति-मोक्ष नहीं हो सकता। जीवात्मा अपने वतन, अपने घर, अपने मालिक के पास नहीं पहुंच सकती है। श्रद्धा भाव तो जगेगा। जितना श्रद्धा, प्रेम, भाव-भक्ति होगी उसका बुनियादी फल तो आपको मिल जाएगा, धन-पुत्र परिवार में बढ़ोतरी तो हो जाएगी लेकिन जीवात्मा 1 इंच भी, 1 सेंटीमीटर भी जहां पड़ी हुई है इस शरीर में आगे नहीं बढ़ पाएंगी।

गुरु की याद हर समय बनी रहे

आप कहोगे आप फोटो क्यों लगाते हो। देखो संतमत में फोटो क्यों लगाया जाता है? इसलिए कि गुरु ही संतमत में सब कुछ होते हैं। अन्य मतों में भी गुरु की पूजा होती है। लोग गुरु को ही मानते हैं, प्रथम उन्हीं को मानते हैं।

गुरु ही लोक और परलोक दोनों बनाते हैं

गुरु गोविंद दोऊ खड़े काकै लागू पाय।
बलिहारी गुरु आपने जिन गोविंद दियो बताय।।

गुरु समान दाता नहीं, याचक शीष समान।
तीन लोक की सम्पदा, सो गुरु दीन्ही दान।।

गुरु को सिर राखिये, चलिये आज्ञा माहिं।
कहैं कबीर ता दास को, तीन लोकों भय नाहिं।।

सब धरती कागज करूँ, लिखनी सब बनराय।
सात समुद्र की मसि करूँ, गुरु गुण लिखा न जाय।।

आप यह समझो वहां भी मानते हैं। संतमत में गुरु ही सब कुछ होते हैं। लोक और परलोक दोनों बनाते हैं। गुरु को ही लोक और परलोक बनाने का रास्ता मालूम होता है इसलिए सबसे पहले गुरु का ही ध्यान किया जाता है। गुरु का ध्यान कर प्यारे बिना इसके नहीं छूटना। आप यह समझो इसलिए फोटो लगाया जाता है कि गुरु का चेहरा भूले नहीं। तो ध्यान करते समय गुरु का चेहरा आ जाता है

साधना करने पर अंतर में गुरु के दर्शन होने लगते हैं

अब अगर आप जो पुराने प्रेमी हो आप गुरु महाराज जी के बताए अनुसार ध्यान लगाने लग जाओ और गुरु का आपको अंतर में दर्शन होने लग जाए तो फोटो लगाने की जरूरत नहीं रहेगी।