You are currently viewing भक्ति दिखावे की नहीं होती, भक्ति तो अंदर से झलकती है

जय गुरु देव

प्रेस नोट
9.7.2021
उज्जैन, मध्य प्रदेश

भक्ति दिखावे की नहीं होती, भक्ति तो अंदर से झलकती है

विश्व विख्यात परम सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 7 जुलाई 2021 को यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम (Jaigurudev UKM) पर प्रसारित सतसंग में भक्तों का संदेश दिया कि भक्ति दिखावे की नहीं होती है, भक्ति अंदर से झलकती है। बाहर के दिखावे से कुछ और है और अंदर अगर मैल रहे तो महात्माओं से छिपा नहीं रहता है। वो सब समझते हैं लेकिन मनुष्य शरीर में रहते हैं, मानव स्वभाव में रहते हैं, मनुष्य शरीर से ही और मनुष्य से काम लेना रहता है तो फिर उसी तरह का वह भी व्यवहार कर देते हैं। जानते सब हैं, समझते सब हैं, इसलिए कहा गया

गुरु से कपट, मित्र से चोरी।
या हो अंधा या हो कोढ़ी।।

सन्त सतगुरु से कपट नहीं रखना चाहिए

कपट नहीं रखना चाहिए, हृदय साफ रखना चाहिए। निर्मल हृदय रखना चाहिए संतो के पास रहने वालों को, संतो के पास सेवा करने वालों को, संतो के वचन का पालन करने वालों को।

लाभ और मान क्यों चाहे।
पड़ेगा फिर तुझे देना।।

मनमुखी कौन होता है?

मन के हिसाब से जो चलने वाला होता है, मन जो कहता है उसी हिसाब से शरीर को, बुद्धि को चलाता है, बुद्धि को लगाता है। तो बार-बार समझाया जाता है तो सुनने वाला मनमुखी तो समझता है कि दूसरे के लिए कह रहे हैं, अपने लिए नहीं समझता है। यह हमारे लिए नहीं है, हमको तो प्यार मिल रहा है, सम्मान मिल रहा है, हमको तो सब साधन-सुविधा मिल रही है, हमारा तो नाम हो रहा है, यह सोच लेता है।

छोटे बनकर निर्मल हृदय से ही कुछ प्राप्त कर सकते हो

निर्मल मन जन सो मोहि पावा।
मोहि कपट छल छिद्र न भावा।।

लेकिन जो निर्मल हृदय के होते हैं उनमें कोई मान-सम्मान की चाह, कुछ नहीं। कहते हैं न छोटा बन जाओ, सब प्यार करने लगेंगे। छोटा बन के रहो तो कहीं भी कोई भी चीज की प्राप्ति कहीं से भी कर सकते हो। छोटे को सब प्यार करते हैं। प्यार में अपनी दया से न भी कुछ करने को हो तो कर देते हैं।

गुरु को मानुष जानये तेह नर कहिए अंध।
महा दु:खी संसार में आगे यम का फंद।।

सतपुरुष सदा संसार में नर तन धरके आए।
मगर संसार वाले क्या उन्हें पहचान पाए।।

गुरु कोई हाड़ मांस के शरीर का नाम नहीं। गुरु एक पावर है, शक्ति है जो कण-कण में व्याप्त है।