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परमात्मा की अंश सूक्ष्म जीवात्मा शरीर में बन्द है, किसी मशीन दुरबीन से नहीं देख सकते

उज्जैन, मध्य प्रदेश जीवात्मा को जगाकर उस परमात्मा के दर्शन करने का सरल रास्ता बताने वाले उज्जैन के पूज्य सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 8 जुलाई 2021 को उज्जैन आश्रम से यूट्यूब चैनल पर प्रसारित सतसंग में जीवात्मा के बारे में बताया कि शरीर का संचालन ये परमात्मा की अंश जीवात्मा करती है और ये सब जीवों में मौजूद होती है। लेकिन ये आकार में इतनी छोटी होती है कि छोटे से छोटे कीड़े में भी बन्द हो जाती है। यही कारण है कि किसी भी मशीन या दूरबीन से जीवात्मा नज़र नहीं आती है।

परमात्मा का यह सबसे छोटा टुकड़ा आदमी से लेकर छोटे कीड़ों में भी है

आप यह समझो यह शरीर है, शरीर में जो अंग है, हाथ पैर आंख कौन है? यह सब इसके अंग हैं। यह कहां से चलते हैं? सारा इसका कनेक्शन सर के ऊपर है जिसको इंग्लिश में हेड कहते हैं। हाथ-पैर कट जाए तो आदमी जिंदा रहता है लेकिन सिर कट-फट जाए तो आदमी बच नहीं सकता। जैसे पावर हाउस होता है, बिजली कहीं बनती है, बल्ब कहीं जलता है, पंखा कहीं चलता है, कनेक्शन दूर तक होता है। ऐसे ही इस शरीर का कनेक्शन जितना भी है, सब नसों के द्वारा हेड से है सिर से है। अब सिर का भी सिस्टम है। सिर कैसे चलता है? इसमें एक अलग से पावर शक्ति है जिसको जीवात्मा कहा गया जो परमात्मा का बहुत छोटा सा टुकड़ा है। यह सबके अंदर है, जितने चलने-फिरने वाले जीव है, सबके अंदर है। आदमी, कुत्ता बिल्ली, कीड़ा-मकोड़ा हर किसी में वो ताकत है। अब वह जीवात्मा इतने छोटे आकार में हैं कि छोटे से छोटे कीड़े में भी बंद हो जाती है। इसलिए उसको किसी भी मशीन से देख नहीं सकते हो। इसके बारे में तो इसे देखने वालों ने ही बताया। देखने वाले कौन होते हैं? उसको समझने वाले कौन होते है? जिनको संत कहा गया, मुसलमान फकीरों ने उनको मुर्शीदे कामिल कहा, पूरा फकीर कहा, ईसाई धर्म में उनको मास्टर कहा।

संतो ने देखा कि पावर-शक्ति परमात्मा की अंश जीवात्मा ही इस शरीर को चलाती है

अब यह समझो जब संतो ने देखा तो बताया कि इसको पावर यानी जीवात्मा चलाती है। वह पावर जब निकल जाती है तब शरीर बेकार हो जाता है। कितना भी सुंदर सुडौल शरीर हो, कितना भी तंदुरुस्त हो, कम उम्र का हो, पहलवान बलवान हो लेकिन वही ताकत निकल जाने के बाद यह बिल्कुल मिट्टी हो जाता है। लोग इसको मिट्टी कहने लगते हैं और ले जाकर जला देते हैं। शरीर के अंदर वह परमात्मा की अंश जीवात्मा कुछ दिन के लिए इस शरीर में बंद की जाती है। अब उसके निकलने का भी समय होता है। जब पूरा हो जाता है तब निकल जाती है और जो शरीर के अंगों से पाप करते हैं उनकी निकाली जाती है। बड़ी तकलीफ होती है। बहुत पतले रास्ते से इसे मां के पेट में 5 महीने के बाद डाला जाता है और उसी रास्ते से निकलना होता है तो बड़ी तकलीफ होती है। मार-मार कर के यमराज के दूत इसको निकालते हैं, कूट करके, झुलसा करके इसको निकालते हैं।

मौत के समय तकलीफ न हो, वह रास्ता आपको बताऊंगा

इस समय हम आप तकलीफ जो भोगते रहते हैं, उसे कैसे बचत हो? वह तरीका आज मैं आपको बताऊंगा। यह तरीका अपना लोगे, आप सुमिरन ध्यान भजन करने लगोगे तो आपको तकलीफ में राहत मिलेगी। जब समय पूरा हो जाएगा तब जीवात्मा इस शरीर से निकाली जाएगी तो कोई तकलीफ नहीं होगी और अपने घर, अपने मालिक के पास पहुंच जाओगे। जहां से जीवात्मा डाली गई है, वहां पहुंचा दी जाएगी।
इसी काम के लिए यह मनुष्य शरीर मिला है इस शरीर के रहते-रहते अपनी जीवात्मा को आप अपने मालिक के पास पहुंचा दो।

सतगुरु से नामदान लेकर आप प्रभु के पास जीते जी आना-जाना शुरू कर सकते हो

अब आप यह समझो ऐसा भी रास्ता है, सिस्टम है। जानकार जिनको गुरु सतगुरु कहते हैं, वो मिल जाएं, वह बता दे तो आप अभी से आना-जाना शुरू कर सकते हो अपने प्रीतम के पास, अपने मालिक के पास, अपने प्रभु के पास। भगवान जिसको कहते हो वहां आना-जाना शुरू कर सकते हो। तो आपको वह रास्ता यानी नामदान आपको दिया जायेगा।