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गृहस्थ जीवन खुशहाल बनाने के उपाय -बाबा उमाकान्त जी महाराज

गुजरात अंदर की रूहानी दौलत देने के साथ-साथ गृहस्थी के झगड़ों से बचने के उपाय बता कर इस मनुष्य जीवन को सार्थक बनाने वाले समय के महापुरुष उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त जी महाराज ने अपने 80 दिवसीय काफिले के रांची, झारखंड पड़ाव पर 23 फरवरी 2021 को आयोजित व यूट्यूब चैनल जयगुरूदेवयूकेम पर प्रसारित सतसंग में बताया कि देखो प्रेमियों! झगड़ा घर में होता है, किस का झगड़ा ज्यादा होता है? ज्यादा सास और बहू का होता है। आदमी लोग तो दुकान, नौकरी पर कमाने के लिए चले जाते हैं, यह घर में रहती हैं तो कुछ-कुछ लगा रहता है।

घर की लड़ाई का पता बाहर चल जाता है

यह है कि जब गरीब घर की औरतें लड़ती हैं तो भद्दी-भद्दी गालियां जोर से देती है तो लोगों को पता चल जाता है। और बड़े घर की सास और बहू धीरे बोलती हैं और अंग्रेजी में गाली देती हैं सबको नहीं पता चलता है क्या बोल रही हैं। लेकिन नौकरानी से पूछो तो नौकरानी बता देती हैं कि जैसे बकरा कसाई को देखता है आंखों से ऐसे ही जब एक दूसरे को देखती है तो मैं समझ जाती हूं कि जो बोल रही हैं वह गाली-गुप्ता ही है।

शंका नाश करती है इसलिए शंका का समाधान कर लेना चाहिए

तनिक बातों में मनमुटाव हो जाता है, शंका हो जाती है। शंका अगर हो जाए तो घर नाश हो जाता है। कहीं भी शंका हो जाए तो नुकसान है। शंका नहीं करनी चाहिए, समाधान कर लेना चाहिए। कैसे? कोई औरत भाई मानते हुए ही किसी आदमी से बात कर रही है और उसका पति देख ले तो हर काम में कमी निकलेगा। बोलेगा तो कुछ नहीं लेकिन अंदर-अंदर गुस्सा रहेगा। कोई पुरुष किसी औरत से ही बात कर रहा है और उसकी औरत ने चुपके से उसको देख लिया तो बोलेगी तो कुछ नहीं लेकिन दिनभर में 4-6 बर्तन गुस्से में पिचका डालेगी। और नहीं कुछ होगा तो अपना ही बाल नोच डालेगी, लड़के का ही कान 4-6 बार ऐंठ देगी। अंदर अंदर ही घुटेगी। कुछ नहीं है लेकिन शंका हो गई। शंका में एक दूसरे पर जल्दी विश्वास नहीं होता। अगर सास-बहु को एक दूसरे पर शंका हो गयी तो फिर प्रेम जल्दी एक-दूसरे से नहीं होता है। शंका नहीं करना चाहिए।

बहु, सास को मां और सास, बहू को बेटी माने

दूसरी बात यह है प्रेम की कमी की वजह से भी लड़ाई-झगड़ा होता है। तो प्रेम कब पैदा होता है? जब एक-दूसरे को अपना मान लेते हैं, जान लेते हैं तब प्रेम होता है। जो बहू यानी लड़की जो ससुराल में आती है, एक मां को छोड़ कर के जो आती है तो यह सोच लेना चाहिए कि एक मां को छोड़ कर के आई, यह मुझे सास, हमारी मां मिल गई। मां की तरह जाने-माने, मां की तरह सेवा करें। और सास को यही सोचना चाहिए कि मैंने अपनी लड़की को विदा कर दिया, वह पराई हो गई और पराई लड़की को, दूसरी लड़की को मैं ले आई तो यह मेरी लड़की हो गई, जैसे गोद ले लेते हैं लोग, पुत्र बना लिया, पुत्री बना लिया। तो समझ लो मनमुटाव जल्दी नहीं होगा।

यदि प्रेम होगा तो शंका, मनमुटाव, मन में गांठ जल्दी नहीं बनेगी

छोटी-छोटी बातों में जो गुस्सा आ जाता है, गांठ नहीं बनेगी। जैसे अपनी लड़की मां को कुछ कह दे देती है, मां कुछ कह देती है तो गांठ नहीं बांधते हैं। अंदर घाव नहीं बनता है। पराया समझते हैं तो घाव बन जाता है। और अंदर का घाव जल्दी भरता नहीं है। आप यह समझो बाहर से कोई लठ मार दे तो घाव भर जाएगा लेकिन बातों का घाव अंदर में बराबर बन जाया करता है।

पति-पत्नी के झगड़े को कैसे टालें

पति को गुस्सा आवे तो पत्नी चुप हो जाए और पत्नी को गुस्सा आवे तो पति चुप हो जाए तो झगड़ा टल जाएगा।

संयुक्त परिवार में प्रेम कैसे बनायें

बच्चियों! संयुक्त परिवार में रहती हो तो पहले दूसरे के बच्चे को खिलाओ तो आपसी प्रेम बना रहेगा।