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जय गुरु देव

16.07.2021
कोटा, राजस्थान

घड़ी बता रही है कि जीवन का एक-एक पल निकलता जा रहा है। सोचो ! मौत के बाद कहां जाएंगे

जगह-जगह घूम-घूमकर जीवों को नामदान देकर जीते जी प्रभु के दर्शन का सीधा और सरल मार्ग नामदान बताने वाले वर्तमान के पूरे सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 15 जुलाई 2017 को कोटा, राजस्थान में संदेश दिया कि देखो प्रेमियों समय देखने के लिए घड़ी रखते हो, मोबाइल में भी देखते हो। समय हमेशा एक सा नहीं रहता। तारीख, महीना बदल जाता है। हमेशा 1 से 2 से 3 से 4 बदलते बदलते जब 12 बजता है, दोनों सुई इकट्ठा हो जाती है तो जैसे दोनों हाथ इकट्ठा करके हाथ जोड़ दिया जाए ऐसे ही सुई भी इकट्ठा होकर हाथ जोड़ देती है।

इस परिवर्तनशील संसार में सब अस्थाई है

ऐसे ही आदमी के जीवन का समय एक जैसा नहीं रहता। यह परिवर्तनशील संसार है। इसमें बदलाव होता रहता है। ऐसे ही मनुष्य शरीर में बदलाव होता रहता है। जब समय निकल गया, बहुत से लोग बुड्ढे भी हो गए, पता नहीं चलता है। आपका जो समय निकल गया आप उसको याद नहीं करते हो। ऐसे ही जीवन का एक-एक पल, एक-एक क्षण जो हमको-आपको जीने के लिए मिला है, वह खत्म होता जा रहा है।

24 घंटे देवी-देवता परमात्मा से इसी मनुष्य शरीर को मांगते रहते हैं

अब प्रेमियों यह समय जीवन का क्यों मिला? मनुष्य शरीर- यह देव दुर्लभ शरीर, देवता जिसके लिए 24 घंटा तरसते रहते हैं। कुछ समय के लिए हमको मनुष्य शरीर जो मिला है तो हमको सोचना चाहिए कि दोबारा हम इस दु:ख के संसार में दुख झेलने के लिए न आये। देखो मां के पेट में बहुत तकलीफ रहती है, आप उस चीज को भूल गए हो।

इस काल और माया के देश में फंसकर मौत और परमात्मा को इंसान भूला है

आप देखो प्रेमियों त्रेता में 10 हजार वर्ष की उम्र थी, द्वापर में एक हजार और कलयुग में सौ वर्ष की उम्र बताई गई। इस समय सौ वर्ष भी उम्र पूरी कर पाना मुश्किल है। मां के पेट में जब थे, उस समय सब याद था। लेकिन ये काल और माया का देश है। मां के पेट से निकलने के बाद आप मौत और परमात्मा को भूल गए हो। जिसको याद करने के लिए, पाने, दर्शन के लिए इसी मनुष्य शरीर को हमने-आपने मांगा था, मां के पेट में जब प्रार्थना किया था कि आपको हम नहीं भूलेंगे, अब भूल गए हो।

पहले लोग बराबर सतसंग सुनने की आदत डालते थे, इससे हर तरह की जानकारी रहती थी

पहले के समय में बराबर सत्संग होता रहता था। सत्संग में लोग जाने की आदत डालते थे और जब सत्संग मिलता था तो हर तरह की जानकारी रहती थी। आदमी को यह याद रहता था कि एक दिन हमको यह शरीर छोड़ना है। एक दिन यह दुनिया और दुनिया की सारी चीजें हमको छोड़ना है। दुनिया की चीजों को इकट्ठा करने के लिए हमको इस शरीर से पाप नहीं करना चाहिए। किसी का दिल नहीं दुखाना चाहिए, अंतर आत्मा को गंदा नहीं करना चाहिए, इसके अंदर कोई गंदी चीज खाने-पीने वाली चीजें डालना नहीं चाहिए। इन सब चीजों की जानकारी रहती थी।

जब से सच्चे संतो के पास सतसंग सुनने के लिये लोगों ने जाना बंद किया तब से जीवन नर्क में बदल गया

जब से सत्संग लोगों ने सुनना बंद किया, संत-महात्माओं के पास जाना बंद किया तबसे वही रोजी-रोटी, घर-मकान, बाल-बच्चे। यह चीजें किसी की हुई? किसी की नहीं हुई। यह चीजें नकली है। नकली चीज जो होती है वह काम नहीं आती है। असली चीज ही काम आती है। जैसे हीरा-मोती, सोना-चांदी हो, वो तो काम आ जाता है लेकिन नकला रुपया-पैसा काम नहीं आता, ऐसे ही दुनिया की चीजें एक तरह से नकली हैं।

अगर दुनिया बनाने वाला ही मिल जाए तो दुनिया के चीज तो अपने आप मिल जायेगी

असली चीज क्या है? जिससे दुनिया की सारी चीज मिलना आसान हो जाए। आप यह सोचो प्रेमियों! यह दुनिया किसने बनाया? मालिक ने बनाया, परमात्मा ने बनाया। इसको चलाने के लिए जमीन, हवा, आसमान बनाया। अगर वह मालिक ही मिल जाए आपको तो इस पापी पेट के लिए गुनाह करने की, गलती करने की क्या जरूरत रहेगी? नहीं रहेगी।

जो इच्छा कीन्हि मनमाही ।
हरि प्रताप कछु दुर्लभ नाही।।

जिस चीज की आदमी इच्छा करता था, वह इच्छा पूरी हो जाती थी। देखो इतिहास बताता है सती सावित्री ने अपने पति के प्राण को वापस ले लिया था। सती अनुसूया ने ब्रह्मा विष्णु महेश को छोटा-छोटा बच्चा बना दिया था। इच्छा किया था उन्होंने। देखो हनुमान जी ने इच्छा ही तो किया था कि हम उड़ करके चले जाएं और संजीवनी बूटी ले आवें। लक्ष्मण मूर्छित हो गए, इच्छा किया तो छोटे बन गए, उड़ के गए। तब फिर इच्छा किया कि हमारे अंदर इतनी ताकत आ जाए, हमारा शरीर बड़ा और मजबूत हो जाए, पूरा पहाड़ उठा ले जाएं। आप समझो प्रेमियों! अगर वह मालिक मिल जाएगा तो आपको इस संसार में दोबारा दु:ख झेलने के लिए आना नहीं पड़ेगा।