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-: सर्वधर्म सद्भाव की नजीर बनी बेटियों की शादी

-: परशुराम की बेटियों की शादी में मदद को आगे आए – मस्जिद के इमाम

-: पयाम-ए-इन्सानियत फोरम नें दिया आर्थिक सहयोग

झांसी। जहां एक ओर देश में गाहे-बगाहे धार्मिक विभेद की नकारात्मक खबरें सुनने को मिलती हैं, तो वहीं दूसरी ओर वसुधैव कुटुम्बकम की शिक्षा को चरितार्थ करने वाली वीरांगना की धरती से सर्वधर्म सद्भाव की नजीर समय-समय पर सामने आती है। आज बिजौली के काशीनगर बस्ती में परशुराम की बेटियों की शादी में यही दृश्य देखने को मिला। हर पिता अपनी बच्चियों की शादी की पूरी व्यवस्था करना चाहता है। मगर अक्सर तंगदस्ती इसमें अड़चन पैदा कर देती है। इस तंगदस्ती की वजह से किसी बेटी की विदाई में कठिनाई न हो। इसके लिए भी समाज में आगे आकर सहयोग करने वालों की कोई कमी नहीं है। गंगा-जमुनी तहजीब की धरा पर इसी सोच और नियत से प्रेरित होकर आल इण्डिया पयाम-ए-इन्सानियत फोरम नें मदद को हाथ बढ़ाया। आर्थिक भेंट कर बेटियों की वैवाहिक व्यवस्था में सहयोग किया। मुफ़्ती इमरान नदवी का कहना है कि हम सब समाजी भाई-बहन हैं और बहन की शादी की ज़िम्मेदारी पिता के साथ भाई की भी होती है। हमलोग फोरम के बैनर तले ऐसे कामों में अपना योगदान देकर अपनी खुशकिस्मती समझते हैं कि किसी बहन-बेटी के लिए कुछ कर पाए। साथ ही बताया कि टीकमगढ़ में परशुराम की दोनों बेटियों की शादी तय हुई थी। तंगदस्ती व्यवस्थाओं में अड़चन बन रही थी। इसकी जानकारी फोरम को मिलने पर सहयोग प्रदान किया गया। इस दौरान मुफ़्ती इमरान नदवी, मुफ़्ती अफ्फान असअदी, सय्यद तबरेज़, हाजी मुजाहिद, हसीब अन्सारी आदि मौजूद रहे।