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मोदी सरकार किसान को ऐसा माहौल दे रही है जिससे वह खेती-किसानी से भी बेहतर कमाई कर सके : कैलाश चौधरी

संसद के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने दिए दौसा सांसद जसकौर मीणा सहित विभिन्न संसद सदस्यों के खेती किसानी से जुड़े सवालों के जवाब

दिल्ली/जयपुर/बाड़मेर-जैसलमेर

कोरोना संकट के बीच चल रहे संसद के मानसून सत्र में मंगलवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने राजस्थान के दौसा से लोकसभा सांसद जसकौर मीणा सहित विभिन्न संसद सदस्यों के खेती किसानी से जुड़े सवालों के जवाब दिए। सांसद जसकौर मीणा के एफपीओ की संख्या और महिला किसानों के शक्तिकरण से जुड़े सवाल के जवाब केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने बताया कि सामान्य तौर पर पहले 1000 लेकिन अब घटाकर न्यूनतम संख्या 300 और पहाड़ी इलाकों में न्यूनतम 100 किसानों से एफपीओ (किसान उत्पादक संगठनों) का समूह बनता है। इस समूह का काम है कि किसानों को एक ऐसा वातावरण और सहायता प्रदान करना जिससे वह खेती-किसानी से भी बेहतर कमाई कर सके।

कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने बताया कि इस योजना के तहत किसानों को जरूरत पड़ने पर अधिकतम 15 लाख रुपये तक की सहायता राशि दी जाती है। जिसका उपयोग कर किसान कृषि से जुड़े हुए छोटे-मोटे बिजनेस की शुरुआत कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं। देश के कई हिस्सों से बड़ी संख्या में किसान एफपीओ बनाने को लेकर आगे आ रहे हैं, इसमें महिलाएं भी शामिल है। निश्चित रूप से महिला किसानों के सशक्तिकरण में एफपीओ योजना एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। कैलाश चौधरी ने बताया कि भारत में एक हेक्टेयर या उससे कम कृषि भूमि पर मालिकाना हक रखने वाले किसानों की संख्या सबसे अधिक है।

एपीएमसी मंडियों को मजबूत कर रही है केंद्र सरकार : केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि इन छोटे, मझौले और सीमांत किसानों को मौसम की मार से लेकर उत्पादन, फसल को लेकर बाजार, बीजों के चुनाव तक में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में छोटे और सीमांत किसान अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर कर सकें इसके लिए केंद्र सरकार की तरफ से पीएम किसान और एफपीओ योजना के तहत उनकी मदद की जाती है। इसी के तहत सरकार ने 2023-24 तक 10 हजार नए एफपीओ समूह बनाने की घोषणा की गई है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के दूसरे कैबिनेट विस्तार के बाद हुई पहली कैबिनेट बैठक में मंडियों के जरिए किसानों तक एक लाख करोड़ रुपये किसानों तक पहुंचाने का फैसला किया गया है। साथ ही सरकार ने यह साफ किया है कि मंडिया खत्म नहीं होंगी और एपीएमसी मंडियों को मजबूत किया जाएगा। सरकार ने किसानों से आंदोलन खत्म करने की गुजारिश भी की है।