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भारत को आध्यात्मवादी बना लो,विश्व भी बन जायेगा-बाबा उमाकान्त जी महाराज

पूरे विश्व में गुरु प्रेमी, जिन्होंने गुरु कर रखा है अपने गुरु की पूजा कर रहे हैं

देराठु, अजमेर, राजस्थान कलयुग के इस बढ़ते प्रभाव के बीच धरा पर इस समय मनुष्य शरीर में मौजूद पूरे और समरथ गुरु जो भक्तों की सांसारिक तकलीफों में मदद करें और साथ ही मृत्यु के बाद जीवात्मा की भी पूरी जिम्मेदारी लें, ऐसे पूरे सन्त सतगुरु, उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त जी महाराज ने अपने देराठु, अजमेर स्थित आश्रम से 24 जुलाई 2021 को गुरु पूर्णिमा सतसंग कार्यक्रम में बताया कि साल में 12 पूर्णिमा आती हैं, अधिमास लग जाता है तो एक बढ़ जाती है लेकिन हर पूर्णिमा का अलग अलग महत्व होता है। यह जो जल पृथ्वी वायु अग्नि और आकाश से बना हुआ पंच भौतिक शरीर है 6 तरह की शक्तियां, मां के पेट में इसको बना के तैयार करती है। यह सूर्य और चंद्रमा पर बहुत कुछ निर्भर करता है। जितनी भी चीजें बनाई गयी, सब मनुष्य के लिए ही बनाई। सूर्य, चंद्रमा धरती, आकाश, ग्रह-नक्षत्र, तारे, सब मनुष्य के लिए ही बनाया। सृष्टि की उत्पत्ति के समय मनुष्य के शरीर के विकास के लिए, दिल दिमाग बुद्धि सही रखने के लिए इन चीजों की आवश्यकता पड़ी। तो उन्होंने बना करके तैयार कर दिया, पूरा मसाला तैयार किया इन्होंने। जैसे कोई कल कारखाना लगाना होता है या कोई पिक्चर सिनेमा बनाना होता है तो उसकी कहानी पहले लिखते हैं, गाना बजाना जो उसमें होता है, इसे तैयार करते हैं और फिर उसके बाद बना करके उसको फिर रिलीज करते हैं। ऐसे ही शरीर को चलाने के लिए बहुत कुछ निर्भरता इस सूर्य, चंद्रमा, अमावस्या और पूर्णिमा रहती है, इनका विशेष महत्व रहता है।

पूरे विश्व में गुरु प्रेमी, जिन्होंने गुरु कर रखा है अपने गुरु की पूजा कर रहे हैं

महाराज जी ने कहा कि इस बार गुरु पूर्णिमा है। यह सारी पूर्णिमा में बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि गुरु ही सब कुछ होते हैं, गुरु ही परमेश्वर को दर्शाते हैं, गुरु ही ज्ञान कराते हैं। गुरु बिन होए न ज्ञान। गुरु की महिमा में कबीर साहब, गोस्वामी साहब जितने भी महापुरुष महात्मा हैं, सब लोगों ने लिखने में जैसे कलम तोड़ दिया। समरथ गुरु का वर्णन कर ही नहीं सकते हैं। कहा गया-

सब धरती कागज करूं, लेखनी सब वनराय।
सात समंदर मसि करूं, गुरु गुण लिखा न जाए।।

उन्होंने बताया कि गुरु की महिमा का वर्णन नहीं किया जा सकता है। आप प्रेमियों को समझने की जरूरत है समरथ गुरु से यह धरती खाली नहीं रही है।

आप समझो कलयुग में विशेष रूप से समरथ गुरू और संतों को जीवों को उबारने के लिए आना पड़ा। इसलिए कहा गया-

संतों की महिमा अनंत, अनंत किया उपकार।

वह जो समरथ गुरु, संत, मुर्शीद ए कामिल, सच्चे गुरु रहे उन्होंने ऐसा उपकार किया, ऐसा जीवों के लिए काम किया कि उसका वर्णन नहीं किया जा सकता। लोगों का लोक भी बनाया, परलोक बनाने का रास्ता भी दिया और उस रास्ते पर चलाया भी और कितने ही जीवों को अपने घर, अपने वतन, अपने मालिक के पास सतलोक, जहां से जीवात्माएं आई है, वहां पहुंचा दिया।

भारत को आध्यात्मवादी बना लो, विश्व भी बन जायेगा

महाराज जी ने प्रेमियों से आह्वान किया कि एक काम ही कर लो। लोगों को, देश को आध्यात्मवादी बना दो। भारत को अगर आध्यात्मवादी बना लोगे तो पूरा विश्व आध्यात्मवादी बन जाएगा।

आध्यात्मिकता कि जो जड़ है, भारत में ही है। भारत से ही दूसरे देशों में फैला। भारत के ही लोग जो दूसरे देशों में हैं आध्यात्मिकता के बारे में लोगों को बताए और समझाएं। हम तो प्रयास कर ही रहे हैं। 32 देशों में तो गुरु महाराज जी का फोटो लगवा दिया गया। और वहां पर जो प्रेमी लोग हैं, प्रचारक हैं, अपने-अपने तौर तरीके से प्रचार कर रहे हैं। 15-16 देशों में जहां पर मैं गया, वहां पर लोग साधन-भजन भी कर रहे हैं। साप्ताहिक सत्संग भी कर रहे हैं। वहां पर भोजन प्रसाद भी बांट रहे हैं। जैसे भारत देश में चल रहा है, वैसा वहां पर भोजन प्रसादी बांट रहे हैं।

प्रेमियों! मनोबल ऊंचा करके आगे बढ़ो

हम इससे संतुष्ट नहीं है प्रेमियों। कहते हैं पहले अपना घर-परिवार संभालो फिर उसके बाद में आगे बढ़ो। आपके यहां ही आध्यात्मिकता की बड़ी कमी दिखाई पड़ रही है। लेकिन आप अगर मनोबल ऊंचा करोगे, आगे बढोगे तो पूरा विश्व आध्यात्मवादी हो जाएगा।