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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिवारजनों पर प्रशासन कर रहा है अपराधियों जैसा सलूक

परिजनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लगाई न्याय की गुहार

रामलीला मंच, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्थल, दुकानों और घर को बिना नोटिस ढहाया

मेडिकल कॉलेज के किनारे पर थी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिवारीजनों की भूमि, अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंजिश के चलते किया गया कब्जा

कौशाम्बी। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित परिवार अपनी रिहाईसी जमीन रामलीला मंचन स्थल स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद स्थल को बुलडोजर से जाने के बाद आक्रोशित होकर जिला मुख्यालय आकर पत्रकारों से अपनी पीड़ा सुनाई। इस मौके पर अपनी बात रखते हुए शहीद आश्रित मुकेश त्रिपाठी ने बताया कि उनकी भूमि जो कि 28 बीघे थे उसको पूर्व में थी मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए ले लिया गया है। यही नहीं इसी जमीन के किनारे पर थोड़ी सी रिहाईसी घूमती थी जो कि आबादी में है इस जमीन को भी बीती रात पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने जेसीबी से ढहा दिया। मामले में बोलते हैं उन्होंने बताया कि इस जमीन पर उनकी दुकान है भी थी जिससे उनके परिवार का भरण पोषण होता था जिसके रहा है जाने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के आश्रित परिवार ने जिलाधिकारी को राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए उन्हें अपनी भूमि वापस दिलाए जाने की मांग उठाई है।

इस मौके पर अपनी पीड़ा को उठाते हुए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित ने बताया कि उनके साथ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अपराधियों जैसा शुरू किया जा रहा है बिना नोटिस दिए है और बिना किसी जानकारी के उनकी जमीनों पर कब्जा किया जा रहा है। इस मौके पर बोलते हुए उन्होंने बताया कि इस जमीन पर आजादी के पहले से ही ऐतिहासिक रामलीला चलता है जो कि पूरे भारत में अकेला ऐसा राम लीला मंचन है जो पितृपक्ष में पितरों को समर्पित करते हुए होता है। उन्होंने बताया कि रामलीला मंचन स्थल, शहीद स्थल और उनकी दुकानों को प्रशासनिक अधिकारियों ने भू माफियाओं की मिलीभगत से गैर कानूनी तरीके ध्वस्त किया है।