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पंचायती राज विभाग मजबूत होगा-सम्राट चौधरी

पटना/दिनाँक 28 जुलाई 2021 को श्री सम्राट चौधरी ने कहा बिहार के मुख्यमंत्री एवं उप-मुख्यमंत्री एवं विधान सभा एवं विधान परिषद सदस्य को धन्यवाद दिया।

बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006 की धारा 14 में प्रावधान है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत अपनी प्रथम बैठक के लिए नियत तारीख 5 वर्षों की अवधि तक न कि उससे अधिक बनी रहेगी। समरूप प्रावधान धारा 39 में पंचायत समिति के लिए धारा 66 में जिला परिषद के लिए एवं धारा 92 में ग्राम कचहरी के लिए है। इसका अर्थ यह हुआ कि यथास्थिति ग्राम पंचायत या पंचायत समिति या जिला परिषद या ग्राम कचहरी का सामान्य निर्वाचन 5 वर्ष की अवधि बीतने के पूर्व करा लेना आवश्यक होगा। अगर किसी कारणवश 5 वर्ष की समाप्ति के पूर्व इन निकायों के चुनाव नहीं हो पाए तो संबंधित पंचायतों का कार्य संचालन कैसे किया जाएगा, इस सबंध में अधिनियम में कोई प्रावधान नहीं किया गया है।

  1. त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं एवं ग्राम कचहरियों का पिछला आम चुनाव वर्ष 2016 में अप्रैल-जून तक संपन्न किया गया था। अधिनियम की व्यवस्था के अनुसार जून 2021 तक इन संस्थाओं का आम चुनाव करा लेना राज्य सरकार एवं राज्य निर्वाचन आयोग के लिए बाध्यकारी था। पर वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण उत्पन्न गंभीर स्थिति के चलते विहित अवधि तक इन संस्थाओं का चुनाव कराना संभव नहीं था। 15 जून 2021 के बाद इनकी कार्यावधि समाप्त हो जाने के कारण यह संस्थाएं स्वत: भंग हो जाती।
  2. आप सभी अवगत है कि राज्य के पंचायती राज संस्थाओं द्वारा केंद्र एवं राज्य प्रायोजित ग्रामीण विकास के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों/ योजनाओं को मूर्त रूप दिया जा रहा है। प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर गठित ग्राम कचहरी अपने क्षेत्र अंतर्गत अद्भुत कतिपय आपराधिक एवं दीवानी मामलों का सौहाद्रपूर्ण निष्पादन करने में अग्रणी भूमिका निभा रही है, जिसके फलस्वरूप ग्रामीण क्षेत्र में शांति व्यवस्था एवं भाईचारा कायम है। इन बिंदुओं को दृष्टिपाथ में रखते हुए आवश्यक समझा गया के पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो सकने के कारण अधिनियम में ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए जिससे कि पंचायती राज संस्थाओं एवं ग्राम कचहरियों मैं किए जा रहे कार्यों की लय नहींटूटे।
  3. उक्त आलोक में अधिनियम की धारा 14( ग्राम पंचायत के लिए) धारा 39 (ग्राम कचहरी के लिए) धारा 66 (जिला परिषद के लिए) तथा धारा 92 (ग्राम कचहरी के लिए) मैं संशोधन हेतु यह प्रस्ताव तैयार किया गया कि किसी कारणवश 5 वर्ष के लिए विहित कार्यावधि समाप्त हो जाने के पूर्व इन संस्थाओं का चुनाव नहीं कराए जा सकने के कारण उक्त संस्थाओं की सभी शक्तियों एवं कृत्यों का प्रयोग और संपादन ऐसी परामर्शी समितियों द्वारा किया जाएगा जो सरकार अधिसूचना द्वारा इस निमित्त गठित करें।
  4. राज्य विधानमंडल के सत्र में नहीं होने एवं पंचायतों/ ग्राम कचहरियों के स्वत: भंग हो जाने की तिथि अत्यंत सन्निकट रहने के फलस्वरुप उक्त संशोधन प्रस्ताव को कार्य रूप देने हेतु बिहार पंचायत राज (संशोधन) अध्यादेश 2021 विधि विभाग की अधिसूचना संख्या- एल0जी0-01-13/2021/2677/ले0ज0 दिनांक-02.06.2021, द्वारा प्रख्यापित किया गया, जो आज विधेयक के रूप में विधानमंडल के पटल पर रखा जा रहा है।
    उल्लेखनीय है कि उक्त अध्यादेश के आलोक में पंचायती राज विभाग की अधिसूचना संख्या-2757, दिनांक- 09.06.2021, द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत ,पंचायत समिति, जिला परिषद, एवं ग्राम कचहरी के स्तर पर परामर्श समितियों का गठन किया जा चुका है। इन परामर्शी समितियों में पूर्व से अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों के सम्यक समाज एवं अनुभव रखने वाले उन्हें व्यक्तियों को यथास्थिति अध्यक्ष उपाध्यक्ष एवं सदस्य के रूप में रखा गया है, जो भंग पंचायती राज संस्था/ ग्राम कचहरी में संस्था के प्रधान, उप-प्रधान या सदस्य की भूमिका में थे, याथा- ग्राम पंचायत परामर्शी समिति में मुखिया को परामर्शी समिति का अध्यक्ष, उप- मुखिया को उपाध्यक्ष एवं ग्राम पंचायत सदस्यों को सदस्य बनाया गया है। समरूप व्यवस्था पंचायत समिति जिला परिषद एवं ग्राम कचहरी के लिए की गई है। ग्राम पंचायत समिति समिति के सचिव ग्राम पंचायत सचिव होंगे, जबकि पंचायत समिति परामर्श समिति के कार्यपालक प्राधिकारी के रूप में कार्यपालक पदाधिकारी पंचायत समिति, जिला परिषद परामर्शी समिति के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के रूप में मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद तथा ग्राम कचहरी परामर्शी समिति सचिव के रूप में ग्राम कचहरी सचिव कार्य करेंगे। न्यायमित्र ग्राम कचहरी परामर्शी समिति के न्यायिक कार्यों के निष्पादन में आवश्यक सहयोग प्रदान करेंगे। वार्ड स्तर पर गठित वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समितियां पूर्व की तरह कार्यरत रहेंगी। सरकारी पदाधिकारी/ कर्मी सभी अस्तर की परामर्शी समिति की बैठकों में भाग लेंगे। प्रत्येक स्तर की समिति के पदधारक अपनी कार्यावधि मैं सरकार द्वारा अनुमान्य भत्ते के हकदार होंगे। परामर्शी समिति पर प्रशासनिक नियंत्रण कायम रखने के उद्देश्य से या व्यवस्था प्रस्तावित हैं की कर्तव्यो के निर्वहन में चूक और कदाचार बरतने की स्थिति में संबंधित परामर्शी समिति के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष को सरकार सुनवाई का अवसर प्रदान करते हुए पद से हटा सकेगी। परामर्शी समिति की व्यवस्था पंचायत आम चुनाव संपन्न किए जाने तक की प्रभावी रहेगी।
  5. वर्तमान विधेयक प्रारूप मैं उक्त अध्यादेश के प्रावधानों को अधिनियमित करने के प्रस्ताव के अतिरिक्त बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006 की धारा 60 एवं धारा 87 में संशोधन से संबंधित प्रस्ताव भी सम्मिलित है।
  6. वर्तमान में बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 60 के उप-धारा(1) के अधीन पंचायत समिति के कार्यपालक पदाधिकारी के रूप में प्रखंड विकास पदाधिकारी विहित है, जो सामान्यतया ग्रामीण विकास सेवा के पदाधिकारी होते हैं। प्रखंड विकास पदाधिकारी का कार्य दायित्व अत्याधिक है। उक्त पंचायत समिति के कार्य संचालन में उनकी सहभागिता कम हो जाती है।
  7. प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी की नियुक्ति बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के आधार पर की जाती है एवं उनका वेतन तथा ग्रेड-पे ग्रामीण विकास पदाधिकारी के समतुल्य है। प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी के नियुक्ति एवं नियंत्रित प्राधिकार पंचायती राज विभाग के यथास्थिति सचिव/ प्रधान सचिव/ अपर मुख्य सचिव होते हैं। उक्त परिप्रेक्ष्य में पंचायत समिति के कार्य एवं कार्यक्रमों के सुचारू संचालन हेतु प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी को महत्वपूर्ण दायित्व सौपे जाने की आवश्यकता समझी गई हैं।
  8. उसी प्रकार बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 87 में यह प्रावधान है कि जिला दंडाधिकारी अथवा ऐसा अपर जिला दंडाधिकारी जैसा राज्य सरकार विनिद्रिष्ट करें, की पंक्ति का पदाधिकारी जिला परिषद का मुख्य कार्यपालक अधिकारी होगा तथा जो सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा।
    वर्तमान में जिले के लिए सरकार द्वारा अधिसूचित उप विकास आयुक्त ही जिला परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के रूप में नियुक्त किए जाते हैं। जिला परिषदों की आम शिकायत है कि उप विकास आयुक्त समाहरणालय एवं ग्रामीण विकास विभाग के विभिन्न कार्यों में बहुत व्यस्त रहते हैं तथा जिला परिषद को बहुत कम समय दे पाते हैं, जिसके पास आरोप जिला परिषद की योजनाएं बुरी तरह प्रभावित होती है। जिला परिषद की ओर से से मांग रही है कि जिला परिषद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के रूप में अनन्य रूप से(exclusively) एक ऐसे अधिकारी को अधिक सूचित किया जाए जो जिला परिषद को पर्याप्त समय दे पाए तथा जिला स्तर पर विभिन्न स्तर की पंचायतों के बीच समन्वयन आदि का कार्य तत्परता से कर सके।
  9. उक्त परिप्रेक्ष्य मैं बिहार पंचायती राज में बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006, की धारा 60 में संशोधन कर पंचायत समिति के कार्यपालक पदाधिकारी के रूप में प्रखंड विकास पदाधिकारी के स्थान पर प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी तथा बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006, की धारा 87 में संशोधन कर बिहार प्रशासनिक सेवा के उप सचिव अथवा उससे अन्ययून पंक्ति के पदाधिकारी को अनन्य रूप से (exclusively) जिला परिषद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी को अधिसूचित करने का प्रस्ताव विधेयक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।