You are currently viewing जीव को चौरासी में भ्रमण के बाद गाय-बैल की अंतिम योनि के बाद मनुष्य मिलता हैं

जीव को चौरासी में भ्रमण के बाद गाय-बैल की अंतिम योनि के बाद मनुष्य मिलता हैं

जयपुर राजस्थान कर्मों के जटिल विधान से और नरकों-चौरासी के चक्कर से बचने की युक्ति बताने वाले, आदि से अंत तक का भेद जानने बाटने वाले इस समय के पूरे सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर 27 जुलाई 2018 को जयपुर में, यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर प्रसारित सतसंग में बताया कि गौ हत्या के लिए क्यों मना किया गया? उसको माता का दर्जा क्यों दिया गया? क्योंकि मां से प्यार होता है, मां दूध पिलाती है, पालन-पोषण करती है।

भौतिक दृष्टि से भी गौ से कई लाभ हैं

गाय में तो बहुत से गुण हैं। गाय का गोबर भी उपयोगी है। गोमूत्र से तमाम दवाई बनती हैं। गाय के पास रहने से तमाम तरह के जो कीड़े होते हैं, वह शरीर के खत्म होते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी लोगों के लिए बहुत फायदेमंद होती हैं।

गाय-बैल हत्या से उनकी जीवात्मा मनुष्य शरीर से वंचित हो जाती है

गाय और बैल के बाद इनको मनुष्य शरीर मिलता है। अब उनको अगर काट दिया फिर उनको प्रेत योनि में जाना पड़ेगा। वहां बहुत दिन रहना पड़ेगा। फिर 84 में आना पड़ेगा तब कहीं कोई संत मिलेंगे तब उनका कहीं उद्धार होगा। इसलिए इसे बहुत बड़ा पाप बताया गया। जो बिल्कुल पार होने के कगार पर खड़ा है, मनुष्य शरीर के बाद उसको रास्ता मिल जाएगा, पार हो जाएगा, उसकी हत्या मत करो।

जिसका दूध पियो, उसका मांस मत खाओ

तमाम तरह की बातें बताई गई कि जिसको मां कहो, जिसका दूध पियो, उसका मांस मत खाओ। नहीं तो बुद्धि खराब हो जाएगी, कुदरत नाराज हो जाएगी। आप यह समझो गाय और बैल की योनि के बाद 9 महीना मां के पेट में लटकने के बाद..

कोटि जन्म जब भटका खाया।
तब यह नर तन दुर्लभ पाया।।

जब मालिक की मौज हो गई तब उसने मनुष्य दिया। इसलिए इसकी कीमत पहचानो और पूरे गुरु से रास्ता नामदान का लेकर अपने असला घर सतलोक चलो।