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“प्रशासनिक उदासीनता के चलते ऑवला का बीआरसी केन्द्र बना कमाई का जरिया

केन्द्र संचालक की दबंगई का बने कई शिकार प्रशासन मौन”

ब्यूरो रिपोर्ट बरेली

ऑवला। प्रशासनिक  उदासीनता के चलते तहसील ऑवला का बी आर सी केन्द्र, केन्द्र संचालक की कमाई का जरिया बन कर रह गया है। वोट बनवाना हो या कटवाना य बीएलओ ड्यूटी कटवाने और लगवाने के लिए एक बोतल और नकदी देना आवश्यक बताई जाती है। कहने को तो बीएलओ ड्यूटी को काटने और लगाने का एकाधिकार तहसील के मुखिया को होता है मगर यहाॅ केन्द्र संचालक ही मुखिया की भूमिका निभाता है। स्वयं तहसील पर कार्यरत कर्मचारी ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए बताया कि तहसील का बीआरसी केन्द्र जिसके नाम पंजीकृत है वह यहाॅ रहता ही नही है उसके नाम पर उसका भाई केन्द्र का संचालन करता है जो मातहतों से ड्यूटी कटवाने और लगवाने के नाम पर एक बोतल और नकदी की मांग भी करता है जो उसकी फरमाइश पूरी कर देता है उसकी ड्यूटी कट भी जाती है और लग भी, लेकिन जो ऐसा नहीं करता है उसे केंद्र संचालक का कोप भाजन बनना ही पडता है। उल्लेखनीय है कि तहसील में चुनाव गतिविधियों के नियंत्रण व अन्य कार्यों के संपादन हेतु एक बीआरसी केन्द्र की स्थापना की गई है जिसका उद्देश्य सरकारी कार्यो का सफल संपादन है मगर स्थानीय बी आरसी केंद्र तहसील प्रशासन की उदासीनता के चलते दलाली का अड्डा बन गया है। भाई के नाम पर आबंटित केन्द्र पर स्वयं को सर्वेसर्वा कहने वाला तथाकथित संचालक ने प्रत्येक काम के अलग अलग रेट निर्धारित कर रखे हैं, जिसमे शराब की ब्रांडेड बोतल भोजन शामिल है। जो व्यक्ति उक्त का भुगतान करता है उसका काम आसानी से हो जाता है जो नहीं करता है उसका काम नहीं हो पाता है। केन्द्र इंचार्ज के इस रवैये से तहसील के सभी कर्मचारी परेशान हैं मगर स्वयं को इस संबंध में असहज ही पाते हैं।