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शंकर जी सिंह
यूपी फाइट टाइम्स
सच्चा मित्र अगर मिल जाए!
अंतस का सतदल खिल जाए!
मित्र त्याग का चाकर होता !
मित्र प्रेम का ढाई आखर होता !
मित्र हृदय की पीड़ा हरता !
अपना सुख न्यौछावर करता !
मित्र जिंदगी की है मुस्कान !
मित्र जिंदगी की है शान !
सच्चा मित्र वही कहलाता !
जो सच पर चलना सिखलाता !
मित्र कृष्ण है मित्र है पार्थ !
मित्र है जीवन का भावार्थ !