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जीवों पर और अपनी जीवात्मा पर दया करो – यही सबसे बड़ा धर्म है

सूरत, गुजरात संसार में जितने भी जीव है, छोटे कीड़ों से लेकर आदमी, उन सभी में परमात्मा कि अंश जीवात्मा है। इस बात का ज्ञान-भान कराने वाले वर्तमान के पूरे सन्त सतगुरु बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 22 जनवरी 2021 को सूरत, गुजरात में यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेम पर प्रसारित सत्संग में बताया कि जैसे आपका बेटा है। मैं कहूं आपसे कि मैं आपसे प्रेम करता हूं और आपके बेटे को थप्पड़ मारूं तो क्या आपको अच्छा लगेगा? आपके बेटे का हाथ-गर्दन काट दूं तो आपको अच्छा लगेगा? नहीं लगेगा। आप बहुत नाराज हो जाओगे, कहोगे अब कुछ नहीं। तुमने हमारे लड़के को मार दिया, गाली दे दिया, हाथ-पैर काट दिया तो आप समझो कैसे दोस्ती रहेगी? कैसे प्रेम रहेगा?

सभी जीवों में एक प्राण, सभी मनुष्य हैं एक समान

उस मालिक से तो प्रेम करते हैं लेकिन उसके बनाए हुए जीवों की हिंसा-हत्या कर देते है। दया करो। दया धर्म बहुत बड़ा धर्म है। जीवों पर दया करो। और अपनी इस जीवात्मा पर भी दया करो जो इन्हीं दोनों आंखों के बीच में बैठी हुई है। वही इस शरीर को चलाती है चक्रों के द्वारा। उस पर दया करो। असला काम यही है। अर्थ धर्म काम और मोक्ष। इस शरीर के रहते-रहते इस जीवात्मा को मुक्ति और मोक्ष दिला दो।

जीवात्मा जब सतलोक पहुंचेगी तब इसको इस दु:ख के संसार में दु:ख झेलने के लिए वापिस आना नहीं पड़ेगा

शमशान घाट पर जाओ कहीं-कहीं लिखा रहता है- मुक्ति धाम, मोक्ष धाम। कोई मुर्दा लेकर के जाए तो चाहे दो दिन लग जाए, जलाए बिना वापस नहीं लाता। सब जलाकर ही आते हैं। ऐसे ही ऐसी जगह जीवात्मा को पहुंचा दो जहां से यह नीचे वापस न आवे। जब वहां पहुंचेगी, जहां से ये नीचे उतारी गई है जिसको सतलोक कहा गया तब यह नीचे नहीं आएगी। इस दु:ख के संसार में दुख झेलने के लिए नहीं आएगी।

इस दु:खों के संसार में घर-घर में बीमारी, लड़ाई-झगड़ा, यहां कोई सुखी नहीं

यह संसार दुखों का हो गया। यहां कोई सुखी है? घर-घर में बीमारी, लड़ाई-झगड़ा है। आप जो बैठे हो, किसी से कह दिया जाए कि कोई तुम्हारे घर में किसी के यहां एक साल में झगड़ा नहीं हुआ, कोई बीमार नहीं पड़ा तो हाथ उठा नहीं सकते हो। कुछ घर तो ऐसे हैं जहां बीमारी बनी ही रहती है, जहां रोज झगड़ा होता है। ये न बतावे तो मैं बता दूंगा। एक-दो नहीं दस-बीस-पचास को बता दूंगा, झूठ निकल जाए तो कहना।

खान-पान, चाल-चलन खराब होने की वजह से कोई उपदेश करता है तो उनकी बात समझ में नहीं आती

दुखों का ये संसार हो गया। इसका कारण क्या है? खान-पान, चाल चलन लोगों का बिगड़ गया, लोगों की विचार-भावनाएं गंदी हो गई। अगर कोई उपदेश करता भी है, समझाता-बताता भी है तो आदमी उपदेश वाली जगह तो सुन लेता है लेकिन घर में जाकर भूल जाता है। जो सामने रहता है, वही याद रहता है। इसलिए आप लोग अपनी रहनी-गहनी सुधारो।