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ब्लड बैंक से खून न दिए जाने के मामले में ब्लड बैंक प्रभारी पर हुई कार्रवाई

देवरिया। ब्लड बैंक में युवक की मिन्नतों के बाद भी खून न दिए जाने की वजह से उसके भाई की हुई मौत हो गई थी। मामले में जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर कर्तव्यों का निर्वहन सही ढंग से न किए जाने पर मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक के डॉ. अकील अहमद को डीएम ने विशेष परिनिंदा प्रविष्टि प्रदान की है।

ग्राम नकटापार रामअवध टोला निवासी हरेंद्र चौहान एनीमिया से पीड़ित थे और न्यू कालोनी स्थित एक नर्सिंग होम में भर्ती थे। जहां उनके पैर का ऑपरेशन हुआ था। 47 बार रक्तदान करने वाले उपेंद्र यादव ने कुछ ही दिन पूर्व जिला अस्पताल में ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ के शिविर में रक्तदान किया था। हरेंद्र को एक यूनिट ब्लड दिलाने के लिए उपेंद्र यादव ने ब्लड बैंक के अधिकारियों से गुहार लगाई और कहा कि हरेंद्र की जीवन रक्षा के लिए एक यूनिट ब्लड की जरूरत है। इसके एवज में उनका भाई संजीव खून देने को तैयार है। मेरे डोनेशन कार्ड पर एक यूनिट ब्लड मुहैया करा दिया जाए, लेकिन ब्लड बैंक के अधिकारियों ने शासन के आदेश के नाम पर हीलाहवाली कर डोनेशन कार्ड पर खून जारी नहीं किया। मामले की शिकायत भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी के वाइस चेयरमैन अखिलेंद्र शाही और उपेंद्र यादव ने डीएम आशुतोष निरंजन से की। इसी बीच खून के अभाव में मरीज ने दम तोड़ दिया। मरीज की मौत के बाद डीएम ने पूरे मामले में अपर जिला मजिस्ट्रेट प्रशासन कुंवर पंकज की अध्यक्षता में त्रिस्तरीय कमेटी गठित कर जांच सौंपी थी। जांच कमेटी ने 13 जुलाई को अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंप दी। अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में कहा हैं कि मरीज के परिजनों को शासनादेश नहीं दिखाना और यह कहना कि खुद ढूंढकर पढ़ लो, आपत्तिजनक है। अगर शासनादेश के तहत ब्लड नहीं दिया जा सकता था तो मरीज के तीमारदार को सही जानकारी दी जानी चाहिए कि ऐसी परिस्थिति वह कैसे ब्लड प्राप्त करें। रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने ब्लड बैंक के चिकित्साधिकारी डॉ. अकील अहमद को उदासीनता बरतने के लिए विशेष परिनिंदा प्रविष्टि दी है।

यू येफ्टी न्यूज़24 के लिए देवरिया से ज्ञानेश्वर बरनवाल की रिपोर्ट।