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जय गुरु देव

13.08.2021
प्रेस नोट
सीकर, राजस्थान

त्यागियों का ही इतिहास में नाम आता है- बाबा उमाकान्त जी महाराज

मानव को आध्यात्मिक और भौतिक दोनों क्षेत्रों में अपने जीवन के उच्चतम विकास के साथ-साथ जीवन के बाद भी इतिहास में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में अंकित करने का मार्ग प्रशस्त करने वाले उज्जैन के बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 11 अगस्त 2021 को सीकर, राजस्थान में यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयुकेएम से प्रसारित संदेश में बताया कि देखो प्रेमियों! यह भारत एक आध्यात्मिक देश कहलाता है। ऋषि मुनि योगी योगेश्वर आध्यात्मिक संत इक्का-दुक्का छोड़कर बाकी सब इस धरती पर हुए। अब उनका नाम इतिहास में क्यों लिखा हुआ है क्योंकि उन्होंने थोड़ा त्याग किया।

त्याग किसको कहते हैं

कोई चीज हमारे पास है और उसको दे दिया जाता है तो कहते हैं उन्होंने त्याग किया। अपने पास था, उसको दे दिया उसको त्याग कहते है। जो अच्छे काम में त्याग किये है आज देखो उन्हीं की पूजा हो रही है। कहते हैं भोगी राजाओं की पूजा नहीं हुई, जिन्होंने लंगोटी लगाया, त्याग किया, उन महात्माओं की पूजा हुई।

इतिहास में नाम किसका आता है?

त्यागियों का ही आता है। देखो बच्चे घर को छोड़कर के चाहे थोड़े समय के लिए ही हो विद्यालय में जाते हो, वह भी एक त्याग है। बड़े स्कूल कॉलेज गांव में नहीं होते तो शहर में जाते हैं, पकाते हैं, खाते हैं और पढ़ाई करते तो उसको भी त्याग कहते है।

भारत के शाकाहारी राष्ट्रपति में भी त्याग किया जिससे इतिहास में नाम आया

देखो इतिहास मिलता है जिन लोगों ने पढ़ाई के लिए या तरक्की के लिए गृहस्थी को भी छोड़ा उनका भी नाम हुआ। भारत देश के एक राष्ट्रपति हुए हैं जिन्होंने विज्ञान में बहुत तरक्की किया था। भारत के आध्यात्मिक विज्ञान को लेकर के जो लोग आगे बढ़े, वही तरक्की कर गए। उनसे पूछा गया आप क्या खाते हो? बोले मैं शाकाहारी भोजन खाता हूं, मैं शाकाहारी हूं। शाकाहारी का दिल-दिमाग-बुद्धि अलग होती है। बुद्धि में प्रखरता रहती हैं। बुद्धि किसी चीज को जल्दी पकड़ती है जिसको इंग्लिश में कैचिंग पावर कहते हैं वो ज्यादा होती है। उसी आधार पर उन्होंने विज्ञान में बहुत तरक्की किया। भारत के दिए हुए विज्ञान को, आध्यात्मिक विज्ञान को विदेशों में जब लोग ले गए, वहां पर तरक्की किए। लेकिन उनकी तरक्की विकास के बजाय विनाश में बदल रही है। क्यों बदल रही है? मांसाहारी होने के कारण जो मांस खाता है, उनके अंदर दया भाव नहीं रहता जिससे उसकी दिल दिमाग बुद्धि विनाशकारी होती है। आप देखो कुछ पशु ऐसे होते हैं जो हिंसा करते हैं। उनके अंदर दया नहीं होती। उनका मांस जब मनुष्य खाता है तो उसी तरह की प्रवृत्ति हो जाती है। त्याग वाली बात के अंतर्गत मैं आपको बताना चाहूंगा, भारत के राष्ट्रपति जो वैज्ञानिक हुए विज्ञान में उन्होंने बहुत तरक्की किया। उनसे पूछा गया कि आप ने शादी क्यों नहीं किया तो बोले हमारे पास मौका नहीं था कि हम शादी कर लेते, बच्चों को संभाल पाते, की बीवी को देख पाते क्योंकि हम लगातार अपने विज्ञान के विकास लगे रहे।

जिन्होंने त्याग किया इतिहास में उन्हीं का नाम आ गया

चाहे वह ग्रहस्त हो, गरीब हो, राजा महाराजा रहे हो। त्यागियों में उनका नाम आ जाता है। और जब त्याग करके लग जाते हैं किसी काम में, अपने लक्ष्य के लिए जब लगते हैं, लक्ष्य बनाकर के जब चलते हैं तो ही सिद्ध हो जाते हैं, वही महात्मा हो जाते हैं।