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प्रथम महिला शहीद ‘वीरांगना’ रानी अवंतीबाई लोधी जयंती मंझनपुर के ओसा में बड़े धूमधाम से मनाया गया सह मुख्य अतिथि के रूप में लवलेश सिंह लोधी समाजसेवी रहे *लवलेश सिंह ने बताया कि हमारे समाज में जन्मे अवंती बाई लोधी भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली प्रथम महिला शहीद ‘वीरांगना’ रानी अवंतीबाई लोधी जी की जयंती के अवसर पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुवे उन्होंने कहा साहस शौर्य की प्रतिमूर्ति, अंग्रेज़ी हुकूमत के ख़िलाफ 1857 की क्रांति में अहम भूमिका निभाने वाली महान वीरांगना, अमर बलिदानी रानी अवंतीबाई लोधी की जयंती पर शत् शत् नमन् करते हुवे आज भी भारत की पवित्र भूमि ऐसे वीर-वीरांगनाओं की कहानियों से भरी पड़ी है जिन्होंने *1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर देश के आजाद होने तक भिन्न-भिन्न रूप में अपना अहम योगदान दिया है*, लेकिन भारतीय इतिहासकारों ने हमेशा से उन्हें नजरअंदाज किया है।
देश में सरकारों या प्रमुख सामाजिक संगठनों द्वारा स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े हुए लोगों के जो कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं वो सिर्फ और सिर्फ कुछ प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के ही होते हैं। लेकिन बहुत से ऐसे स्वतंत्रता *संग्राम सेनानी हैं जिनके अहम योगदान को न तो सरकारें याद करती हैं, न ही समाज याद करता है*, लेकिन उनका योगदान भी देश के अग्रणी श्रेणी में गिने जाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से कम नहीं है।
अपने समाज को एकजुट रहने का संदेश देते हुवे *लवलेश ने कहा अपने बच्चो को अपने महापुरुषो के बारे जागरूक करें जिससे हमारे बच्चे अपने महापुरुषों को जान सके* लोधी ने कहा कि हमारा समाज शिक्षा में पीछे हो रहा है उन्होंने कहा कि जिसका समाज शिक्षा में पीछे है वो समाज सदैव पीछे रहता है