You are currently viewing नानी बाई रो मायरो कथा सुनने उमड़ी भीड़

दिनांक -20 अगस्त2021

रिपोर्टर प्रहलाद सिंह

नानी बाई रो मायरो कथा सुनने उमड़ी भीड़

दिवान्दी रोहट नानी बाई रो मायरो कथा का आयोजन शुरू हुआ। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पंडाल में पहुंचे। कथा वाचक हरीश जी महाराज हनुमानगढ़ और महाराज जी ने कथा का शुभारंभ करते हुए कहा कि नानी बाई रो मायरो अटूट श्रद्धा पर आधारित प्रेरणादायी कथा है। कथा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण का गुणगान किया जाता है। भगवान को यदि सच्चे मन से याद किया जाए तो वे अपने भक्त की रक्षा करने स्वयं आते हैं। हरीश जी महाराज ने कथा का झांकियों के साथ विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि नानी बाई रो मायरो की शुरुआत नरसी भगत के जीवन से हुई। नरसी का जन्म गुजरात के जूनागढ़ में आज से 600 साल पूर्व हुमायूं के शासनकाल में हुआ। नरसी जन्म से ही गूंगे-बहरे थे। वह अपनी दादी के पास रहते थे। उनके एक भाई-भाभी भी थे। भाभी का स्वभाव कड़क था। एक संत की कृपा से नरसी की आवाज गई तथा उनका बहरापन भी ठीक हो गया। नरसी के माता-पिता गांव की एक महामारी का शिकार हो गए। नरसी का विवाह हुआ, लेकिन छोटी उम्र में पत्नी भगवान को प्यारी हो गई।
इस समय समय पदम सिह दिवान्दी , बालु सिह ,अशोक सिह भागीरथ सैन ,काना राम देवासी , राजू भाई पटेल , गणपत सोलंकी , समस्त ग्रामवासी दिवान्दी लोगो मौजूद थे |