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जय गुरु देव

दिनांक: 7 जून 2021
स्थान: बाबा उमाकान्त जी महाराज आश्रम, उज्जैन, म.प्र.

बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के 9वें वार्षिक भंडारा पर्व पर बाबा उमाकान्त जी महाराज का संदेश

विश्वविख्यात परम् सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज उज्जैन ने बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के वार्षिक भंडारा (ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष त्रियोदशी) के शुभ अवसर पर यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम (jaigurudevukm) के ऑनलाइन माध्यम से प्रसारित सायं कालीन सतसंग में बताया कि गुरु महाराज ने जो लोक-परलोक बनाने का रास्ता बताया उस पर चलने की जरुरत है.

बाबा जयगुरुदेव ने आध्यात्मिक दौलत भी खूब लुटाई और जिन्होंने इच्छा की उन्होंने प्राप्त किया

गुरु महाराज इस धरती के एक विलक्ष्ण महापुरुष थे. अपने मनुष्य जीवन में विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उनके गुरु यानी दादा गुरु से नामदान लिया, खूब मेहनत से भजन किया. और जब आध्यात्मिक दौलत उन्हें मिली तो उन्हें आदेश हुआ की अब इसको बाँट दो. खुले मंच से गुरु महाराज जब नामदान देने लगे तो करोड़ों क्या, गिनती कर पाना मुश्किल है, इतने लोगों को जीते जी प्रभु प्राप्ति का रास्ता – नामदान दिया. जिसने अपनी झोली भरना चाहा, उसकी झोली भर गयी.

समय निकला जा रहा है, कब करोगे अपना आत्म कल्याण?

प्रेमियों! सतसंगियों! नामदानियों! कब करोगे? ध्यान-भजन में यदि लग जाओ, उसमें यदि तरक्की हो जाए तो आपके सब काम बन जाए. जब नहीं हो पाता है तब सेवा का रास्ता निकाला जाता है. सेवा करने से कर्म कटेंगे वर्ना कर्मों की सजा से कोई बच नहीं सकता है. कर्मों की सजा सबको मिलती है इसलिए सेवा का विधान बनाया जाता है. संतों को दोहरा काम करना पड़ता है. गुरु महाराज बराबर कहते थे की जब तकलीफ हो जाए तो तुरंत दवा ले लेनी चाहिये.

कोरोना दुश्मन है, कभी भी हमला कर सकता है, होशियार रहो
प्रेमियों! ये कोरोना क्या है? ये दुश्मन है. दुश्मन से हमेशा होशियार रहना चाहिए. आपको लगातार बताता रहा की लापरवाही मत करो, सजग रहो, नियम-कानून का पालन करो. लापरवाही करने में, बातों को भूल जाने पर ही कई चले गए, इसी में. आपको दवा भी बताई लेकिन दवा का भी इस्तेमाल न करो, आप उससे भी परहेज कर जाओ तो? कहने का मतलब ये है की दुश्मन को कमजोर नहीं समझना चाहिए. ये कोरोना और ये जो बीमारियाँ आ रही, ये जो चंडी अपना रूप दिखा रही, ये काल भगवान अपना रूप दिखा रहे, अपना कारनामा जो शुरू किये इससे सबको हमेशा होशियार रहने की जरुरत है. मैं कहता रहा हूँ. शरीर स्वस्थ रहेगा तो आप भजन भी कर पाओगे, अपने बच्चों की परवरिश भी कर पाओगे. बीमारियाँ सीजनल होती हैं, उम्र के हिसाब से होती हैं. कर्मों की बीमारियों को भोगना पड़ता है. ये कल भगवान् का विधान है. जो लोग काल भगवान् के बनाये हुए शरीर में हैं उनको भी इनके नियम का पालन करना चाहिए. प्रेमियों द्वारा दया मांगने पर गुरु महाराज भी दया करते थे, फायदा होता था लेकिन बराबर कर्म करने के लिए कहते थे.

गुरु महाराज ने कई समाज सेवा के कार्य किये

गुरु महाराज ने कई काम जनहित के जनजागरण के किये. जयगुरुदेव नाम कोई जानता ही नहीं था, इसका प्रचार किया, करवाया, साइकिल यात्रा निकलवाई, बड़े काफिले किये, शाकाहारी का प्रचार करवाया, व्यवस्था सही करने के लिए दूरदर्शी बनाया, भूमिजोतक खेतिहर काश्तकार संघटन बनवाया, कई घोषणाएं की और करवाई. उनका कुछ काम तो हुआ लेकिन बहुत सारा काम बाकी है. और उसको करने में उनको कठिनाईयां मिली, बहुत भारी पड़ रहा है.

महापुरुष किसी के बस में नहीं होते. कलयुग जायेगा, सतयुग आएगा

महापुरुष, भाव-भक्ति वाले सतसंगी और साधकों पर काल का दावं नहीं चलता. गुरु उनकी डोर को हमेशा अपने पास पकड़ कर रखते हैं. जब चाहते हैं तब डोर को खींच लेते हैं, अपने पास बुला लेते हैं. गुरु महाराज जो काम छोड़ कर गए वो सब होगा और तभी इस धरती पर सतयुग का प्रादुर्भाव होगा. महापुरुष की बात गलत नहीं होती. सतयुग इस धरती पर आएगा लेकिन देखेगे कौन, इसकी गारंटी नहीं है. सतयुग आयेगा तो सब ठीक हो जायेगा. प्रेमियों! ये कोरोना रोग दुश्मन है, कभी भी हमला कर देगा. इसलिए मनमानी मत करो. बातें जो बताई जाए उस पर अमल करो. मदद तो होती है लेकिन जो मदद करता है उसको अपने शरीर से भोगना पड़ता है. नियम-कानून के अनुसार भंडारा मनाओ, प्रार्थना करो, ध्यान-भजन करो, नाम ध्वनि बोलो और नयों को भी बुलवाओ. भंडारा तो खूब चल रहा है और आगे भी चलाने की जरुरत है.