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जयगुरुदेव

13.06.2021
उज्जैन मध्य प्रदेश

प्रेमियों! 9 सालों में गुरु की दया और आप के सहयोग से बहुत काम हुआ है-बाबा उमाकान्त जी महाराज

विश्वविख्यात परम् सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के 9वें वार्षिक भंडारा पर यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम (jaigurudevukm) पर 08 जून 2021 को प्रसारित प्रातः कालीन सतसंग में बताया कि प्रेमियों! 9 साल में आपके सहयोग से कम काम नहीं हुआ। आप के हर प्रांत में जगह-जगह पर स्थान बन गए, आश्रम बन गए। आश्रमों पर गुरु महाराज का फोटो लग गया। जहां जगह है वहां गौशाला-अस्पताल खुल गए। बहुत जगह से लोगों को बराबर भोजन निशुल्क कराया जा रहा है। जो भी काम है, सब निशुल्क कराया जा रहा है। पब्लिक को एक भी पैसा किसी से नहीं लेना-देना रहता है। ऐसा जनता का तमाम काम निशुल्क हो रहा है।

32 देशों में गुरु महाराज का फोटो लग गया, जयगुरुदेव नाम पहुंच गया।

आप देखो आपके सामने (उज्जैन आश्रम परिसर में पूर्णतया निःशुल्क) अस्पताल बना हुआ है। गुरु महाराज की दया कम नहीं है। 32 देशों के लोग आए थे दिल्ली में, जब शाकाहारी सम्मेलन हुआ था। 32 देशों में गुरु महाराज का फोटो लग गया, वहां जयगुरुदेव नाम पहुंच गया। हर विदेशी आदमी जयगुरुदेव नाम के बारे में कुछ न कुछ लोगों को समझाता-बताता भी है। 15-16 देशों में जहां तक मैं गया, लोगों को मैंने नाम दान दिया, वहां पर संगते खड़ी हो गई। ध्यान-भजन लोग करने लग गए, साप्ताहिक सत्संग करने लग गए, भोजन बांटने लग गए, कुछ जगहों पर तो आश्रम भी बना लिया। कम काम नहीं हुआ है, सब आपके सहयोग से और गुरु महाराज की दया से हुआ है।

प्रेमियों! मनोबल ऊंचा रखो और जल्दी काम करने के लिए टीम बना लो।

आपके अंदर मनोबल होना चाहिए। आप का मनोबल ऊंचा रहेगा, आपके अंदर इच्छा रहेगी कि गुरु महाराज का नाम-काम हम बढावें तो प्रेमियों! बढ़ता जाएगा, कम नहीं होगा। अब यह सत्संग की धारा बह चुकी है, अब यह धारा रुकने वाली नहीं है। गुरु महाराज हमारे-आपके ऊपर यह काम छोड़ कर के गए हैं। इसे अगर जल्दी करना है तो आप काम करने वालों की टीम बनाओ और सहयोगी तैयार कर लो क्योंकि हर तरह के आदमियों की जरूरत है, देश में भी जरूरत है और विदेशों में भी जरूरत है।

प्रांतों के जिम्मेदार अपनी-अपनी व्यवस्था बना लो और उसके अंतर्गत काम करो, अभी बहुत काम है।

पुराने लोग सब बुड्ढे हो गए हैं। हमारे सहयोगी भी ज्यादातर बुड्ढे ही हैं। जब बुड्ढे हो जाते हैं तो दिल-दिमाग बदन में ताजगी नहीं रहती हैं। वह तो जब बोला जाता है तब करंट आता है। लेकिन कहां तक मैं भी बोल पाऊंगा? अब केंद्र से व्यवस्था होती थी, आपको निर्देश मिलता था, आपको बताया जाता था और आप काम करते थे, उस पर अब आप निर्भर न रहो। प्रांत के जितने भी जिम्मेदार हो या ऑनलाइन इस सतसंग को सुन रहे हो, आप लोग अपने-अपने क्षेत्र के अनुसार व्यवस्था-योजना बनाओ। गुरु महाराज के नाम और काम को आप सब लोग समझ गए हो। नाम को पहुंचाने का तरीका भी आपको बहुत लोगों को मालूम हो गया है। नाम को पहुंचाने के लिए काम को करने के लिए आप लोग अपनी-अपनी व्यवस्था सब बना लो और उसके अंतर्गत आप सब काम करो। बहुत काम है, प्रेमियों! बहुत काम है।