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इस बार 9 दिनों तक गुरु पूर्णिमा मना कर खूब गुरु की दया लो – बाबा उमाकान्त जी महाराज

जयपुर, राजस्थान इसी कलयुग में सतयुग को लाने के लिए अथक परिश्रम में जुटे उज्जैन के पूज्य सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 18 जुलाई 2021 को जयपुर में अपने लघु सतसंग में बताया कि जो स्थान आपने गुरु महाराज को याद करने, ध्यान-भजन करने के लिए बनाया है तो बराबर ये काम करते रहो। जो लोग नहीं आते हैं, उन्हें भी बुलाओ। सतसंग में जाने से, सतसंग सुनने से, ध्यान-भजन-सेवा करने से गुरु की दया मिलती है, ये गुरु की दया के घाट हैं। जो घाट पर बराबर हाजरी लगता है तो चाहे देर लग जाए लेकिन दया हो ही जाती है। प्रेमियों! कोशिश करो की दुबारा मनुष्य शरीर न धारण करना पड़े, जीव-जंतु के शरीर में न जाना पड़े। इसी जनम में अपना काम बना लो। 84 लाख योनियों में केवल इसी मनुष्य शरीर से ही आत्म कल्याण हो सकता है। बराबर गुरु को याद करते रहो, दया के घाट पर बैठते रहो।

गुरु से दया कैसे ली जाती है, सीख लो, समझ लो

माँ बच्चे की देखरेख तो करती रहती है लेकिन रोने पर ही दौड़कर जाती है, दूध पिलाती है, तकलीफ दूर कर देती है। ऐसे ही गुरु भी दया करते हैं। दया लेना सीख जाएँ, रोना सीख जाएँ, गुरु के वचनों का पालन करना सीख जाएँ और गुरु को समझ जाएँ। इसकी सीख सतसंग सुनने से मिलती है। साप्तहिक सतसंगों में आकर, एक दुसरे से बात कर जानकारी प्राप्त कर लेते हैं.

संस्कार बड़ी चीज होती है, बच्चों का ध्यान रखो

आजकल सतसंगियों के बच्चे बिगड़ने ज्यादा लगे। दादा-बाप की पीढ़ी तो ठीक रही लेकिन अगली पीढ़ी पर ध्यान, नजर रखो। उन्हें जब सतसंगों में लाने लगोगे, ध्यान-भजन में बैठाने लगोगे, नाम ध्वनि बुलवाने लग जाओगे तो उनके संस्कार बदल जायेंगे। ऐसे संस्कारी बच्चे जो सीमा पर पहरा देने लग गए, माइनस में तापमान रहा, वहां लोगों ने कहा कि यहाँ शराब और मांस के बिना ज़िंदा नहीं रह सकते तो ये ज़िंदा रह कर दिखा देंगे। देखो इनका मनोबल कितना उंचा है। शाकाहारी संस्कारी लड़के स्वस्थ हैं, प्रसन्नचित हैं और बाकी लोग बीमार भी हो गए। इनके अन्दर दीनता, बल, बुद्धि आ गयी। सतसंगियों की लड़कियां विदेशों में गयी जहां 99 प्रतिशत मांसाहारी, वहां भी शाकाहारी रह कर, ट्रेनिंग पूरी करके, आईपीएस बन गयी, अच्छे ओहदे पर चली गयी। हमारे पास सब खबर है। यदि ध्यान न दो तो छोटे बच्चे जल्दी बिगड़ जाते हैं, ध्यान रखो। शहर के लोग, आप ज्यादा ध्यान रखो। ध्यान-भजन-सेवा बराबर होते रहे.

संकल्प बना कर ध्यान-भजन में बैठा करो

जब ध्यान-भजन में मन न लगे तो देखो मन किधर जा रहा है। समझो उसी अंग से अपराध बना है तो उन अंगों से सेवा करना शुरू कर दो। इससे मन उधर से हट जायेगा। मन ही शरीर को, सभी अंगों को चलता है। जब सेवा करके अंग थक जायेंगे तो मन के कहने पर भी कुछ गलत कर्म नहीं करेंगे तो मन भी हार जायेगा कि बेकार है कुछ कहना। इसी लिए तो कहते हैं की संकल्प बना कर ध्यान-भजन में बैठा करो की हमको आधा घंटा-एक घंटा तो बैठना ही है। संकल्प बन लोगे तो मन हार जायेगा। वरना मन उछाल पैदा कर देगा, उठा देगा और जिधर खाने-पीने-बोलने आदि का स्वाद इसे मिल गया उधर शरीर को ले जायेगा। ये काल और माया का देश है। दोनों नहीं चाहते हैं की जीव अपने घर जाएँ। इस समय दोनों का जोर चल रहा है। पुरुषों पर माया का और स्त्रियों पर काल का हमला होता है। दोनों इस समय अपनी हुकूमत, राज्य को बचाने में लगे हैं क्यूंकि गुरु महाराज का मिशन पूरा करने के लिए प्रेमियों में जोश आ गया है। लोग ये सोचने लगे की जिनको गुरु महाराज ने जिम्मेदारी दी (पूज्य महाराज जी) वो जब अस्वस्थ, कमजोर रहते हुए हिम्मत नहीं हार रहे हैं, आगे बढ़ते जा रहे हैं तो हम क्यूँ पीछे रहें?

प्रेमियों में आये जोश की वजह से अब कलयुग घबरा रहा है

लड़ाई में हिम्मत ख़ास चीज होती है। हिम्मत नहीं हारना चाहिए। हिम्मत अब लोगों में आई तो अब कलयुग घबरा रहा है। क्यूंकि आपकी-हमारी लड़ाई किसी राजा, प्रशासन, जनता, देश, व्यक्ति से नहीं बल्कि कलयुग से है तो कलयुग तो जोर लगाएगा ही। जब आप सतसंग में आते-जाते रहोगे तो समझ में आ जायेगा की कलयुग का असर कहाँ-कहाँ पर है और उस असर से दूर रहने के लिए क्या करना चाहिए। इसलिए सतसंग जरुरी है। सतसंग से ही शंका दूर होती है, मैलाई कटती है, दिल-दिमाग की सफाई होती है।

गुरुपूर्णिमा राजस्थान में मनाई जाएगी

इस कोरोना काल में बड़े कार्यक्रम नहीं हो सकते। सरकार भी लोगों की जान बचाना चाहती है, सुरक्षित रहना और लोगों को रखना है तो इस छूत की, कर्मों की बीमारी से बचो, नियम का पालन करो। नामदान दे दिया जायेगा। गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम राजस्थान में कहीं किसी आश्रम पर हो जायेगा। गुरु की महिमा है, महत्त्व है तो आषाढ़ पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा में गुरु की पूजा कर, गुरु को खुश कर दया मांगते हैं। गुरु की दया सबको लेना जरुरी है। अपनी-अपनी समय-परिस्तिथि के अनुसार गुरु की पूजा फोटो लगा के, ध्यान-भजन-नाम ध्वनि करके, भोजन-प्रसाद खिला दो या पैकेट बंटवा दो। हिन्दुस्तान में भी हर प्रान्तों में अपने लोग हो गए। कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए बाबा जयगुरुदेव जी महाराज संगत से जुड़े और प्रेम रखने वाले सभी लोग जिला, ब्लाक, तहसील, गाँव स्तर या अपने घरों पर गुरु पूर्णिमा जोर-शोर से मना लो.

गुरुपूर्णिमा अब नौ दिनों की मनाओ

एक दिन के त्योंहार में उतनी दया नहीं मिल पायेगी इसलिए इस गुरु पूर्णिमा के त्योंहार को नौ दिनों – 24 जुलाई से 1 अगस्त 2021 तक मनाओ तो जिले में कई जगह पर हो जायेगा। कार्यक्रम में आने के लिए प्रेमी जब पैसा खर्च करते, दिल-दिमाग लगाते कि कौनसी ट्रेन-बस से जाएँ, कैसे जाएँ, क्या करें, कहाँ से घूमना है, कैसे चलना है – इन सब से कर्म कटते थे। शरीर, मन, धन तीनों की सेवा होती थी। तो जब कई दिनों का कार्यक्रम होगा तो आपके कर्म कटेंगे।

आपसे चूक हुई होगी तो अब ये मेहनत दुबारा करो

कहा गया कि संतों की द्रष्टि से द्रष्टि मिल जाने पर कर्म कटते हैं:
सनमुख होइ जीव मोहि जबहीं
जन्म कोटि अघ नासहिं तबहीं

सन्त सतसंग सुना कर आपको दया का पात्र बनते हैं। फिर द्रष्टि से, वाणी से, स्पर्श से दया करते हैं। ये अब (इस कोरोना काल में) हो नहीं सकता लेकिन दया लेना और कर्मों को काटना, दोनों जरुरी है तो इसलिए आप नौ दिनों तक मनाओ। जैसा बच्चा लापरवाही करके किसी विषय में फेल हो जाता है तो उसे सप्प्लिमेंट्री में भी मेहनत तो करनी ही पड़ती है। तो कहीं चूक हुई होगी तो आपको दुबारा ये मेहनत करनी पड़ेगी, जिससे कमी दूर हो जाये, लाभ मिल जाए। तो इसे सबको बता दो। अपने-अपने हिसाब से भंडारा कर लो। पहले दिन तो मीठा बना ही लो। मैं जब पूजा करूंगा तो उस प्रसाद को सब जगह पहुंचा दो, और उसमें मिला लेना, तो दया जुड़ जाएगी.