बस्ती में पत्रकारों की समस्याओं को लेकर जिलाधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन

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जिला संवाददाता अरुण त्रिपाठी

मीडिया में क्रांतिकारी बदलाव आया है। बैंक खातों से जिस प्रकार ग्राहक अब शाखाओं के खुलने के इंतजार नही करते उसी तरह देश की बहुत बड़ी आबादी अब अखबारों का इंतजार नही करती बल्कि अपनी मोबाइल और कम्प्यूटर पर जब और जहां का समाचार देखना चाहा देख लिया। इस बड़े बदलाव ने देश की जनता की मीडिया से उम्मीदों को कई गुना बढ़ा दिया है। अनेक माध्यम इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रहे हैं। नतीजा ये है कि वेब मीडिया प्रिण्ट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का उम्दा विकल्प बनकर उभरा है।
अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि वेब मीडिया को किसी भी प्रकार की सुविधा देय नही है। आरएनआई में सूचीबद्ध करने की कोई स्पष्ट गाइडलाइन भी नही है। जिससे देशभर में लाखों की संख्या में संचालित वेब समाचार माध्यमों से जुड़े पत्रकारों को सूचना विभागों में कोई महत्व नही दिया जा रहा है। विशिष्टजनों के आगमन पर सूचना कार्यालय से जारी होने वाले मीडिया पास से भी पत्रकार वंचित रह जाते हैं। पत्रकारों को नफरत की दृष्टि से देखा जा रहा है। ऐसे में हम वेब मीडिया के संचालक और इससे जुड़े पत्रकार उपरोक्त समस्या पर विचार विमर्श
वेब समाचार माध्यमों के लिये स्पष्ट गाइडलाइन जारी की जाय।


वेब माध्यमों को आरएनआई में सूचीबद्ध किया जाय। जिससे इससे जुड़े पत्रकारों को उचित सम्मान मिले।
विशिष्टजनों के आगमन पर दोहरे मापदण्ड से बंचते हुये वेब मीडिया के पत्रकारों को उदारतापूर्वक पास जारी किये जायें।
वेब मीडिया और इससे जुड़े पत्रकारों को भी मान्यता प्रदान की जाय।
समस्त जिलाधिकारियों को इस आशय के निर्देश दिये जायें कि पत्रकार उत्पीड़न मामलों की सुनवाई के लिये कमसे कम 3 सदस्यीय समिति बनायें जो मामलों की समयबद्ध निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट सौंपे जिसके आधार पर कार्यवाही सुनिश्चित की जाये
इस दौरान दिलीप भटट, आलोक चौधरी, राजकुमार पांडे,सैयद जीशान, हैदर गिरी,हेमंत पाण्डेय, दिनेश उपाध्याय ,बीपी लहरी ,सुनील पांडे ,लव कुश विश्वकर्मा ,राकेश तिवारी ,बाल मुकुंद शुक्ला ,वकील अहमद ,नंदकिशोर राजन चौधरी ,दिनेश पांडे ,अमित कुमार श्रीवास्तव, सौरभ विश्व पति वर्मा ,अनिल, अजीत, शैलेंद्र पाठक, मुन्नी लाल जायसवाल आदि उपस्थित रहे।

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