बदायूं – शाहजी से बली का रिश्ता है सूफी जी का, तीन दिवसीय उर्स का कुल से समापन महफिले मीलाद के साथ हुई तकरीरे

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शाहजी से शाह वली से रिश्ता है सूफी जी का

मुर्शिद की निगाहें पड़ते ही मखदूम वली बन जाता है

सूफी जी के तीन रोज़ा उर्स का कुल से समापन, महफिले मीलाद के साथ हुई तकरीरें 

रिपोर्ट- प्रेम कमल वार्ष्णेय के साथ सचिन कमल वार्ष्णेय वजीरगंज

वजीरगंज ( बदायूं ) | हजरत सूफी सिब्ते अहमद साहब के तीन रोज़ा उर्स शरीफ में क़ुरआन ख्वानी महफिले मीलाद के बाद बुधवार रात्रि को अजीमुश्शान जलसा हुआ जिसके बाद गुरुवार को कुल शरीफ की फातिहा के साथ समापन किया गया । समस्त कार्यक्रम की सरपरस्ती व सदारत खलीफए मियाँ हुज़ूर हज़रत अनवर मियां व निजामत नौजवान शायर हिलाल बदायूनी व कारी शमशाद आलम सिरसवी ने फरमाई |

जलसे में अल्लामा मौलाना हाफ़िज़ कारी गुलाम यासीन ने कहा औलिया अल्लाह की सीरत को ज़िंदगी में उतारने की ज़रूरत है इसी से हम निजात पा सकते हैं ।

नौजवान शायर हिलाल बदायूँनी ने कहा 
किस दर्जा खूबसूरत शजरा है सूफी जी का ।
शाहजी से शाह वली से रिश्ता है सूफी जी का ।

अल्लामा मौलाना मुस्तजाब हुसैन कदीरी मुरादाबादी ने कहा
जिस दिन से निगाहों ने देखा है मदीने को ।
रह रहके ख्याल आजाये जन्नत हो तो ऐसी हो ।

हाफ़िज़ सैफी तनवीर ने कहा
जिसका नशा चढ़ेगा न उतरेगा हश्र तक ।
मैं सबको वक शराबे वफ़ा देके जाऊंगा ।

कारी शमशाद आलम सिरसवी ने कहा
मेरी दुआ में अल्लाह ये असर दे दे ।
मैं उड़ के जाऊं मदीने में मुझको पर दे दे ।।

डॉ नासिर बदायूँनी
अगर तुम दो सहारा सिब्ते अहमद ।
तो तूफ़ां हो किनारा सिब्ते अहमद ।

हाफ़िज़ ज़ियाउल साबरी बिसौलवी ने कहा
नादार को मिलती है शाही मोहताज गनी बन जाता है ।
मुर्शिद की निगाहें पड़ते ही मखदूम वली बन जाता है ।

जलसे में में कलाम पढ़ते हुए अनवर कादरी ने कहा
नफ़स की भूख है जन्नत की तमन्ना क्या है ।
उनके बीमार से पूछो की मदीना क्या है ।

सगीर बदायूँनी ने कहा
उर्से पाक में आपके दर से अक्सर हमने देखा है ।
बहते हैं बरकत के धारे सिब्ते अहमद सूफी जी ।

कुल शरीफ के कार्यक्रम में गुरुवार एक बजे से महफिले मीलाद ख्वानी तक़रीर हुई जिसके बाद सलाम पेश किया गया | कार्यक्रम के मेहमाने खुसूसी खालिफए मियां हुज़ूर अनवर मियां ने कुल की फातिहा के बाद मुल्क में अमन चैन व हाजरीन के लिए मखसूस दुआ फरमाई | कुल की फातिहा के बाद खानकाह आलिया मुहम्मदिया के सज्जादानशीन से बड़ी तादाद में लोग मुरीद हुए । फातिहा के तबर्रुकात के बाद लंगर तकसीम किया गया । महफ़िल मे हाफ़िज़ अबरार अहमद ज़ाहिद , हाफ़िज़ जीशान , जौक वजीरगंजवी, सरफराज , गयूर अली हन्नान क़ादरी असलम मोअज़्ज़िन चेयरमैंन उमर कुरेशी डा गुच्छन इरफ़ान क़दीर खान , हाजी हनीफ खा पप्पू मसूदी साबिरनूर मंसूरी सादुल्ला मंसूरी नूर मुहम्मद मेम्बर जाबिर सैफी मुहीउद्दीन आबिद अली अमीनुल सैफी यासीन सैफी मा खलील अहमद राज बैंड हुसैन मुन्तेयाज़ मसूदी अलीमुहम्मद मसूदी इंतज़ार मसूदी जमील असगर सुलेमान सलमानी असरार सलमानी समेत सैकड़ो लोग मौजूद रहे | उर्स शरीफ के समापन पर सूफी साहब के साहबजादगान क़मरुज़्ज़मा शम्सुज्ज़मा आलविन टेलर व रफ़ीउज्ज़मा एडवोकेट ने सभी का आभार व्यक्त किया ||

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