कौन कारण नाथ मोहिं मारा, मैं बैरी सुग्रीव अति प्यारा

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  • आखिर एसपी की गाज सीओ पर ही क्यों …..?

  • आख़िलानंद राव

  • कसया, कुशीनगर। ‘कौन कारण नाथ मोहिं मारा, मैं बैरी सुग्रीव अति प्यारा’ कहावत उक्त कहावत सीओ कसया पर फिट बैठती है।
    थानाक्षेत्र में एक पखवारे से बढ़ी आपराधिक घटनाओं पर पुलिस अधीक्षक कुशीनगर विनोद कुमार मिश्रा की नराजगी की गाज क्षेत्राधिकारी शिव स्वरूप पर गिर गयी। एसपी की गाज के नीचे बड़ी मछली आ गयी। जबकि छोटी मछली ने चाल किया और बड़ी पर गुजर गयी।
    नगर में चर्चा हो रही है कि सीओ शिव स्वरूप काफी मिलनसार, अच्छे प्रशासक और सुलझे हुए अधिकारी हैं। सीओ कसया पर पुलिस अधीक्षक की नारजगी भरी इस कार्यवाही के कई मायने निकाले जा रहे हैं। इनमें एक की ला एन्ड आर्डर दुरुस्त रखना है। दूसरा की आम लोगों को संदेश देना कि अपराध पर काबू पाने के लिए किसी को बख्शा नहीं जाएगा। क्षेत्राधिकारी सर्किल पर करवाई तो हो गयी। लेकिन असल मे जिस पर करवाई होनी चाहिए बच गया। यह भी चर्चा है कि थाना क्षेत्र में अवैध धंधे चाहे वह गौ तस्करी का हो या अवैध शराब का या फिर देह व्यापार का हर धंधे में कसया पुलिस की मिलीभगत है। इन धंधों को चलाने के एवज में एक मोटी रकम खाकीं को जाती है। जिसकी निगरानी के लिए कुछ पुलिस के जवान संलिप्त रहते हैं। जो माफिया, दलाल और तस्करों के बीच एक चेन की तरह सेतु का काम करते हैं। देखा जाय तो जरायम पेशे से जुड़े लोगों के धंधो को आगे बढ़ाने में खांकी की अहम भूमिका हो गयी है। इसकी शर्त की एक मुश्त रकम बड़े साहब को जाती है। इन सभी धंधों को कराने वाले एसपी की करवाई से बच गए लेकिन सीओ कसया को जाना पड़ा। जबकि करवाई तो थाने की टीम पर होनी चाहिए थी। पुलिस की नाकामी वर्ष 2019 में दर्ज दर्जनों मामले में मुल्जिमों की गिरफ्तारी तक नहीं हुई। हाल ही में कुशीनगर विधानसभा से भाजपा के विधायक रजनीकान्त मणि त्रिपाठी के आवास पर असलहा लेकर पहुंचने वाले मुजरिमों में मुख्य अभियुक्त पुलिस की पकड़ से बाहर है। इस तरह के दर्जनों मामले हैं जिसमें एसएचओ की भूमिका अपराध व अधिकारियों को संरक्षण देने तक ही रह गया है। थाना परिसर में न्याय के लिए जाने वाले आम लोगों को परिक्रमा करना पड़ता है लेकिन बिचौलिये के माध्यम से मुकदमा दर्ज होता है। और मनमाफिक मैनेज भी चलता है। जिसकी जानकारी जिले के आला अधिकारियों की भी है लेकिन लम्बे हाथ वाले एसएचओ एसपी की गाज से निकल गए।

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