प्रदेश सचिव भारतीय अल्पसंख्यक महासभा उत्तर प्रदेस इंजीनियर अहमद रज़ा ने देश कें सियासत पर लिखा कुछ पंक्तिया समाज सेवक हैं रजा

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प्रदेश सचिव भारतीय अल्पसंख्यक महासभा उत्तर प्रदेस इंजीनियर अहमद रज़ा ने देश कें सियासत और देश को जोड़ने वालें तथ्य पर लिखा कुछ पंक्तिया

सामाजिक कार्यकर्ता हैं अहमद रजा

अहमद रजा ने अपने कुछ इस अंदाज में लिखा देश को जोड़ने वाले शब्द तुम राम की कहानियों में इतिहास तलाशते हो और मैं युगों से चली आ रही एक डोर को तलाशता हूँ।तुम अपने लिखे इतिहास को देखो जो तुम्हारे बचपन से बुढ़ापे तक के ही सफ़र में हाँफने लगा है।अपनी लिखी कहानियों को देखो तो उनका स्वरुप भी बिगड़ चुका है।हज़ारों सालों में बहुत से सच्चे किरदार मिथक लगने ही लगेंगे।उनकी कहानियों में बहुत जोड़ घटाओ तो हो सकता है मगर इतना मान लो की हज़ारों साल से चलते आ रहे किस्से कोई तो सच की डोर थामे हैं जो आजभी ज़बान दर ज़बान आगे बढ़ रहें हैं।

मैं अयोध्या की माटी में नँगे पाँव टहला हूँ।मैं सरयू के पानी में भी उतरा हूँ।उसमें अपने राम से भी मिला हूँ।वोह राम जिनका दिल हर एक के लिए नरम है।जिनके होने से माँ का रुतबा दुनिया को पता चला।माँ की एक मांग पर सालों के दर्द को समेट जो मुस्कुराता चला गया,वोह हमारे दिल में आ ही नही पाए।हमारी ज़बान तो राम के नाम से चलती है मगर हमारे दिलउनसे ख़ाली हैं।हमारे चरित्र में राम हैं ही नहीं।मुझे सरयू में नहाते वक़्त मेरे राम का वोह शांत चेहरा याद है।जैसे कह रहें हों की तुम भी मत परेशान हो।जब तक यह सारे हमारे इंसानों में नफ़रत बोते रहेंगे मैं सरयू से बाहर नही आऊँगा।

जब कोई कहता है की रामराज्य लौट आएगा।या हम राम राज्य लाएँगे।तो यक़ीन जानो मैं बेतहाशा भागता हूँ की क्या मेरे राम आने वाले हैं।क्या वाक़ई कोई राम बन सकता है।मैं पूरे दावे से कह सकता हूँ की इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में अब दोबारा रामराज्य नही आ सकता क्योंकि अब मेरे राम नही आएँगे।रामराज्य लाने के लिए राम बनना पड़ता है जो की नामुमकिन है।क्यों की राम बना नही जा सकता,राम तो खुद होते हैं।

उनके इतना विशाल हृदय का कोई होही नही सकता।राम सिर्फ अपनी माँ के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम नही थे,बल्कि उस वक़्त की हर माँ के लिए वोह राम थे।अब कौन है जो अपनी माँ को छोड़कर दूसरे की माँ के आँचल की रखवाली करे।जिन्हें जो लगता है लगे मगर मेरे राम के रामराज्य को यूँ बदनाम मत करो।मेरे राम मेरे दिल में उतरकर सुक़ून पहुंचाते हैं।मुझसे बाते करते हैं।मेरे दिल में इकट्ठा होने वाले मैल को खत्म करते हैं।मुझसे सरयू के पानी में खड़े होकर बाते करते हैं।

मुझे मेरा ह्रदय बड़ा करने को कहते रहते हैं।सरयू के पानी में अपना वजूद खो चुके मेरे आँसुओ को पहचानकर दिल पर हाथ रखते हैं की सब सुंदर हो जाएगा।बस तूम बिना डरे,बिना घबराए हर दिल को अपनाते चले जाना।
मैं नही जानता की मैं और मेरे राम की बातचीत कोई सुन सकता है।मुझे नही पता की मेरे दिल में मौजूद राम कभी आवाज़ देंगे भी या नही।मुझे बस इतना पता है की अन्याय के विरुद्ध खड़े होने के बावजूद मुझे मेरा ह्रदय नरम और सरल रखना है।

मेरे लिए ज़मीन पर मौजूद हर व्यक्ति की माँ की इज़्ज़त करना मुझे मेरे राम के नज़दीक़ ले जाएगा।मेरे राम उसके ह्रदय में कभी नही आएँगे जो धनुष से तो प्रभावित है मगर राम के चरित्र से दूर है।मेरे राम ज़बान के सच्चे,दिल के नरम और सामाजिक कर्तव्य के लिए हमेशा खड़े ऐसे चरित्र हैं जो हज़ारों साल के बावजूद ज़मीन पर हमारे आपके बीच हैं।आज रामनवमी है अगर दिल में मेरे राम आहट दें तो मोहब्बत से,त्याग से दूसरे दिलों को जीतने की कोशिश करना।जिनके दिल में मेरे राम होंगे वोह भौतिक व्यवस्था में बेचैन होकर नही टहलेंगे।मेरे राम तुम्हारे बने किसी भी खाँचे से दूर मेरे दिल में बैठ बतयाते ही रहेंगे।हाँ मेरे राम हर उस दिल में ही रहेंगे जिनमे मोहब्बत हो,त्याग हो,बाकि लोग ताउम्र ढूंढे मेरे राम को..

कसया तहसील रिपोर्ट
विरेन्द्र यादव

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