बलरामपुर। टूटी-फूटी सड़के खोल रही गड्ढा मुक्त अभियान की पोल

राधेश्याम गुप्ता

रेहरा बाजार/बलरामपुर। हुसेनाबाद,पेहर,छपिया,सादुल्ला नगर,सादुल्लानगर-जाफरपुर सम्पर्क मार्ग,रेहरा बाजार आदि जगहों पर बनी सडको की हालत बहुत ही दयनीय है।उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सड़को को गड्ढा मुक्त करने का जो फ़रमान जिले के जिम्मेदार अधिकारियों को सुनाया था।उसका असर महज एक-आध ग्राम पंचायतों में व अन्य जगहों पर देखने को मिल रहा है।हैरत की बात यह है कि जिन ग्राम पंचायतों की एक-आध सड़कों को गड्ढा मुक्त अभियान के तहत ठीक किया गया था।उन सड़को ने ग्राम पंचायत में हुए विकास कार्य की पोल खोल कर रख दी है।सही ढंग से इन सड़कों को गड्ढा मुक्त किए हुए अभी छः माह भी नही बीते है यह सड़के फिर से गड्ढा युक्त हो चुकी है।जिनकी सुध लेना जिले के संबंधित अधिकारी मुनासिब नही समझ रहे है।बताते चले कि सूबे के मुखिया उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा बलरामपुर जिले की सड़कों को गड्ढा मुक्त योजना के तहत गड्ढा मुक्त करने का फ़रमान जिले के जिम्मेदार अधिकारियों को सुनाया गया था।जिसको लेकर आनन-फानन में जिले के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कई ग्राम पंचायतों में व बाज़ारो के मुख्य मार्गों को गड्ढा मुक्त कर कालम पूरा कर दिया गया।मगर गड्ढा मुक्त योजना के तहत कराए गए कार्यों की हकीकत जानना किसी ने भी मुनासिब नही समझा।जिसके चलते सड़कों की हालत फिर से गड्ढा युक्त हो गयी।जिसको लेकर क्षेत्र के कई सामजसेवी लोगो ने नाराजगी जाहिर की है और कहा कि सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।और गड्डा मुक्त योजना के तहत हुए कार्यो का स्थलीय निरीक्षण करवा कर संबंधित के खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए।क्षेत्र के युवा सामजसेवी आरजू काज़मी,सुधाकर सिंह,श्याम जी,उदयभान मौर्या,नंद किशोर श्रीवास्तव, सियाराम सरोज, रामबहादुर शर्मा, अमन सिंह,राधेश्याम यादव आदि लोगो का कहना है कि सरकार ने जो सड़कों को गड्डा मुक्त करने का दावा जनता से किया था।उन दावों की हकीकत को ग्राम पंचायतों में जाकर देखा जा सकता है।कई ग्राम पंचायतों की सड़कों पर पैदल चलना भी दूभर है।प्रदेश के मुखिया को व जिले के जिम्मेदार अधिकारियों को इस कि जानकारी होनी चाहिए कि किन-किन ग्राम पंचायतों में गड्डा मुक्त योजना के तहत कार्य करवाया गया है।और उस की वास्तविक स्थित अब क्या है।और जिन ग्राम पंचायतों में गड्डा मुक्त अभियान का असर नही दिखा है उन अधूरे पड़े ग्राम पंचायतों की तरफ भी ध्यान दिया जाना चाहिए॥