You are currently viewing बिजली कटौती को लेकर कैलाश चौधरी का मुख्यमंत्री गहलोत पर तंज : आधा घंटा अपनी एसी बंद करो, जनता का दर्द समझ में आ जाएगा

बिजली कटौती को लेकर कैलाश चौधरी का मुख्यमंत्री गहलोत पर तंज : आधा घंटा अपनी एसी बंद करो, जनता का दर्द समझ में आ जाएगा

केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी का प्रदेश की गहलोत सरकार पर हमला, कहा- कुप्रबंधन के कारण अघोषित बिजली कटौती से शहर और गांव बेहाल

दिल्ली/जयपुर

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने मंगलवार को गहलोत सरकार पर बिजली कटौती को लेकर तंज कसते हुए हमला बोला। कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि राज्य की कांग्रेस सरकार के कुप्रबंधन के कारण प्रदेश में अघोषित बिजली कटौती का संकट खड़ा हो गया है। इसके साथ ही कैलाश चौधरी ने मांग की है कि बिजली नागरिकों की मूलभूत सुविधा है, इसलिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की लापरवाह सरकार के कुप्रबंधन के कारण आज प्रदेश विद्युत संकट से जूझ रहा है। प्रदेश की जनता आज बिजली की कटौती से परेशान है और इसके जिम्मेदार एसी कमरों में बैठकर जनता के दर्द को तमाशे के रूप में देख रहे है।

कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री जी, अगर हमारे कार्यालय और आवास पर चंद मिनट के लिए भी बिजली चली जाए तो हम कितना जतन करते है। सोचिए 50 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले क्षेत्रों में रहने वाले हमारे प्रदेशवासी किस तरह बिना विद्युत के अपनी दिनचर्या काटने को मजबूर होंगे। कैलाश चौधरी ने कहा कि अपने ऐशो आराम और लंबे समय से चल रहे है ‘वर्क फ्रॉम होम’ से तनिक समय निकाल कर एक आम आदमी के जीवन को भी करीब से देखने की कोशिश कीजियेगा साहब, नहीं तो आधे घंटे के लिए अपना एसी ही बंद कर दीजिएगा। हो सकता है शायद आपको अपनी जिम्मेदारियों का बोध हो जाएगा।

अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है प्रदेश की कांग्रेस सरकार : केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि संवेदनहीनता की पराकाष्ठा तो तब पार होती है जब थर्मल प्लांट बंद होने के बाद सरकार को कोयले की कमी के बारे में पता चलता है। कैलाश चौधरी ने कहा कि चाहे कोरोना संक्रमण की परिस्थितियों के समय प्रबंधन का मामला हो या प्रदेश के सामने अन्य किसी चुनौती का, यह सरकार हमेशा हाथ खड़े करके जिम्मेदारियों से भागने का काम करती आई है। सरकार के जिम्मेदार अपने बयानों के माध्यम से प्रदेश की जनता को भयभीत करने में कोई कसर नहीं छोड़ते। उन्होंने कहा कि अपने कर्तव्य को समझिए साहब, अपनी कुर्सी पर लटकती तलवार के संकट के दर्द के बजाए जनता के दर्द को भी समझिए।