रोटी का संकट परिवार चलाने के लिए   मनरेगा मे काम करने को मजबूर

कौशाम्बी:-लॉकडाउन से ग्रामीण इलाकों मे बच्चों को ट्यूसन,कोचिंग पढाकर अपना और अपने परिवार का पेट पालने वाले वित्तविहीन शिक्षकों के समक्ष रोजी रोटी का संकट उत्पन्न है, बच्चों का भविष्य बनाने वाले इन शिक्षकों का स्वयं का भविष्य अन्धकार मय हो गया , ग्रामीण इलाकों मे ये शिक्षक बच्चों को पढाकर अपना परिवार चलाते हैं, ये न तो मजदूरी कर सकते है और न ही कोई अन्य कार्य कर सकते हैं, ऐसा नही है कि ये योग्य नही है, इन्ही शिक्षकों की बदौलत ग्रामीण इलाकों मे बच्चे शिक्षा प्राप्त कर बोर्ड परीक्षा मे मोरिट प्राप्त करते हैं, लॉकडाऊन होते ही इनकी रोजी रोटी बन्द हो चुकी है, ये और इनका परिवार दर दर की ठोकर खाने को मजबूर हो गया है,
अनलॉक मे सबकुछ अनलॉक हो चुका है बाजार लग रही है, दुकाने भी खुल चुकी हैं परन्तु सरकार इन शिक्षकों पर कोई ध्यान नही दे रही है, क्यों कि सरकार को इनसे कोई लाभ नही है, अधिकांश शिक्षक मनरेगा मे काम भी शुरू कर दिए हैं।


शिक्षकों ने बताया कि सरकार का ध्यान हमारी तरफ नही है, फरवरी से ही स्कूल बन्द होने से एक एक पैसे के लिए मोहताज हैं, बच्चों का पेट कैसे भरेंगे,इन्होने
सरकार से आग्रह किया है कि सोशल डिस्टेंशिंग का पालन करते, सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए सीमित संख्या मे ग्रामीण इलाकों में ट्यूसन,कोचिंग पढाने की अनुमति दें जिससे कि इन शिक्षकों का परिवार चल सके।