सितम्बर से स्कूल खोलने के पक्ष में केंद्र सरकार, यहां पढ़े पूरी जानकारी

कौशाम्बी

ब्यूरो चीफ आर पी यादव

कौशाम्बी:-केंद्र सरकार और स्कूल प्रशासन स्कूल खोलने की पूरी तैयारी में है पर अभिभावक अभी इस बात से सहमत नजर नहीं आ रहे है। आखिरी फैसला राज्य सरकारों द्वारा लिया जाएगा।
जब से यह कोरोना महामारी आया है और इसके कारण लॉकडाउन हुआ है। तब से ले कर अब तक लगभग 6 महीने बीत चुके है। इन 6 महीनों से ना तो स्कूल खुले ना कॉलेज ना ही कुछ और जगह। सब जगहों को बंद कर दिया गया था। पर अभी कुछ टाइम से सरकार द्वारा कुछ जगहों जैसे की ऑफिस, ट्रेन और मार्किट जैसी जगह खोलने की अनुमति दे दी गई है।

सरकार द्वारा इन सभी जगहों को खोलने की अनुमति के बाद स्कूल कॉलेज भी खोलने के लिए सोचा गया पर यह संभव नहीं हो पाया क्योंकि अभिभावक अभी अपने बच्चों को भेजने को तैयार नहीं थे। तब से ले कर अब तक सरकार और स्कूल यही सोच नहीं पा रहे है कि स्कूल खोले जाएं या नहीं। इस समय भारत में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या 20 लाख से भी अधिक हो गई है और मरने वालों की संख्या 42 हजार तक पहुंच चुकी है।

सरकार कर रही है स्कूल खोलने की तैयारी:

जुलाई से सोचते सोचते सरकार अब स्कूल सितम्बर में खोलने को तैयार है। सरकार के मुताबिक पहले दसवीं से बाहरवीं के बच्चों के लिए स्कूल को खोला जाएगा। उसके बाद 6th से लेकर 9th तक स्कूलों को खोला जाएगा। सोशल डिस्टन्सिंग को ध्यान में रखते हुए बच्चों को अलग अलग हिस्सों में बाँट कर पढ़ाया जाएगा। सरकार और स्कूल के मुताबिक बच्चों की सेहत को देखते हुए एक दिन में सिर्फ दो सेक्शन की पढ़ाई करवाई जाएगी।

बच्चों की सेफ्टी का रखा जाएगा पूरा ख्याल:

जब भी स्कूल खोले जाएंगे तो पूरी तरह से स्कूल और क्लासरुम को सैनिटाइज़ किया जाएगा और स्कूल की टाइमिंग को घटा दिया जाएगा। मतलब की जो स्कूल पहले 5 से 6 घंटे पढ़ाते थे। अब वह 2 से 3 घंटे ही पढ़ाई करवाएंगे। छोटे बच्चों के लिए अभी स्कूल खोलने के पक्ष में सरकार नहीं है। पांचवी तक के स्कूल बंद ही रहेंगे और उनकी ऑनलाइन कक्षा चलती रहेंगी।

स्कूल खोलने का अंतिम फैसला राज्य सरकारें ही लेंगी। इस संबंध में राज्य सरकारों द्वारा अभिभावकों से भी फीडबैक मांगने को कहा गया है जिससे पता चल सके कि अभिभावक स्कूल खोलने के पक्ष में कब तक है। परन्तु अभी कोई भी अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने को राजी नहीं है क्योंकि इस समय बच्चों की जान को काफी रिस्क है और अभिभावक नहीं चाहते कि उनका बच्चा या वो यह रिस्क लें।