अधिवक्ताओं के प्रयास से हुआ जनपद न्यायाधीश का स्थानांतरण, नहीं करेंगे विदाई समारोह – डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन


विनय चौहान

बुलंदशहर। जिला जज के स्थानांतरण में अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है जिनके प्रयासों से जनपद न्यायाधीश नीलकंठ सहाय का स्थानांतरण लखनऊ किया गया है। कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन बुलंदशहर की तरफ से जारी सूचना जिनके जनपद न्यायाधीश नीलकंठ सहाय की प्रशासनिक क्षमता एवं अकर्मण्यता के विरोध में अभियान चलाया गया। जिसमें पत्र व्यवहार एवं धरना प्रदर्शन भी किया गया तथा प्रशासनिक न्यायमूर्ति से उक्त जनपद न्यायाधीश के व्यवहार की शिकायत भी की गई लेकिन सुधार न होने की स्थिति में दिनांक 4 जून 2020 को माननीय मुख्य न्यायमूर्ति उच्च न्यायालय दिल्ली को भी जनपद न्यायाधीश की कार्यशैली के संबंध में पत्र लिखा गया जिसके परिक्षेत्र में जनपद न्यायाधीश का स्थानांतरण सजा के तौर पर न्यायाधिकरण लखनऊ में हो गया है। अतः जनपद न्यायाधीश के विरुद्ध समझते अधिवक्ताओं के सहयोग एवं आत्म बल के कारण ही इस कार्य संपन्न हो पाया है। जिनकी अनेक शिकायतें होने के बाद अब उनका कोई विदाई समारोह नहीं किया जाएगा।


जनपद न्यायाधीश द्वारा अधिवक्ताओं का शोषण किया गया है तथा अन्य अखबारों में निकली खबर जनपद न्यायाधीश बहुत मेहनती और ईमानदार है जिन्होंने अनेक वादों को शीघ्र निस्तारण किया है और उनका दे समारोह किया जाएगा इस खबर का खंडन किया जाता है। जिला जज नीलकंठ सहाय द्वारा न्यायालय में कोई कार्य न करने पर अनेकों वाद प्रतीक्षा सूची में बड़े हुए हैं जिनका निस्तारण अभी तक नहीं हो पाया है अनेक अधिवक्ताओं के कार्य नहीं हो पा रहे हैं जिससे आम जनता के साथ अधिवक्ता भी जनपद न्यायाधीश नीलकंठ साहित्य कार्यों से परेशान हैं जिसका अनेक अधिवक्ताओं ने किया विरोध।


जनपद न्यायाधीश नीलकंठ सहाय के न्यायालय में प्रतिदिन 30 से 35 जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल हो रहे हैं जिसमें से 80% प्रार्थना पत्र 7 वर्ष तक की सजा वाले होते हैं लेकिन जनपद न्यायाधीश सब केसो में अंतरिम जमानत प्रार्थना पत्र खारिज करके जमानत प्रार्थना पत्र पर 8 से 10 दिन की तारीख लगा रहे हैं जिसके कारण बुलंदशहर की जेल में नियत संख्या से अधिक मुलजिम बंद हैं जिससे बुलंदशहर जेल में कोरोना का उच्च स्तर पर है। लेकिन जनपद न्यायाधीश इन बातों पर कोई ध्यान नहीं देकर सभी कार्यों को प्रतीक्षा में डाल रहे हैं। जिनकी शिकायत डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार शर्मा ने उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली को पत्र लिखकर की गई है। जिनके प्रयासों के फलस्वरूप सभी अधिवक्ताओं को सफलता हासिल हुई है।