मांसाहार की वजह से लोगों में क्रोध आ रहा और बुद्धि ख़राब हो रही

प्रेस नोट
16.01.201
कल्याण, मुंबई (महाराष्ट्र)

मांसाहार की वजह से लोगों में क्रोध आ रहा और बुद्धि ख़राब हो रही

  • बाबा उमाकान्त जी महाराज

सबकी भलाई चाहने वाले, सदाचारी शाकाहारी बनाने वाले, शराब जैसे बुद्धिनाशक नशे को छुड़ाने औऱ गाय को राष्ट्रीय पशु बनाकर गऊ माता की जान बचाने का संकल्प लेने वाले उज्जैन के पूज्य सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज जी ने (कल्याण, मुंबई ) में सत्संग देते हुए बताया कि बच्चा जब मां के पेट में रहता है तब उसको पिछले जन्मों का सब दिखाई पड़ता है। वो देखता है कि कितनी बार कुत्ता बने, बिल्ली बने, चूहा बने, सांप बने, बिच्छू बने, बिल्ली ने कैसे हम को नोच-नोच कर खाया, कैसे हम नर्कों गए, कैसे हमको मार पड़ी, कैसे यमराज के दूतों ने हमको नरकों की आग में जलाया-तपाया, उसको दिखाई पड़ता है तो रोता है, चिल्लाता हैं। बच्चा जब माँ के पेट के अंदर रहता हैं तो परमात्मा का दर्शन होता रहता है तो वो परमात्मा से वादा करता है :

हे प्रभु कृपा करहु अब भाँती। सब तजि भजन करहु दिन राती।।

बच्चे को मां के गर्भ की आग तपाती रहती है तो बच्चा परमात्मा से प्रार्थना करता है कि हमको इस नरक रूपी आग से बाहर निकाल दो, हम दिन-रात आप का भजन करेंगे। हे मालिक ! हम आपको कभी नहीं भूलेंगे ।

संत सुलब सब दिन सब देशा।*
सादर सेवक सुमन कलेशा।।*

मां के पेट में जब बच्चा रहता है तो उसको पता रहता है की परमात्मा हमेशा इस धरती पर सन्त रूप में रहते हैं तो मालिक से प्रार्थना करता है कि हम सच्चे सन्त महात्मा की खोज करके उनसे रास्ता लेकर के नामदान लेकर के दिन-रात आप का भजन करेंगे। लेकिन यहां आकर भूल-भ्रम के देश में भूल जाता है। जो मालिक से वादा करके आया है वह भी भूल जाता है। जहां जैसा माहौल वातावरण मिलता है उसी काम में आदमी फंस जाता है – हिंदी पढ़ने में, अंग्रेजी पढ़ने में।

विदेशों में आप देखो कोई संस्कृति है? कोई कल्चर नहीं। खड़े-खड़े खाना, खड़े-खड़े टट्टी, खड़े-खड़े पेशाब। ओ तो यही समझते हैं ।

सत्संग न मिलने के कारण खान-पान और चाल चलन खराब

सत्संग न मिलने के कारण इंसान यही समझता है ,कि खाओ और बच्चा पैदा करो और इस संसार से चले जाओ
महाराज जी कहा सच्चे सन्त का सत्संग न मिलने के कारण इंसान यही समझता है कि ये मनुष्य शरीर हमको खाने-पीने और मौज मस्ती के लिए मिला है ।

अब तो हिंदुस्तान में भी यही विदेशों का कल्चर आ गया

उसकी नकल करने लग गए है। कहते हैं-अंडा खाएंगे तभी तरक्की हो पाएगी, तभी हम वैज्ञानिक बन पाएंगे। डॉक्टर कहते हैं अंडा खाओ, वैज्ञानिक कहते हैं अंडा खाओ। अगर उन्हीं से कहा जाए की मुर्गी का संडास खाओगे? मुर्गी का पेशाब पीयोगे? मुर्गी का खून पियोगे?

अंडा बनता कैसे है – यह वैज्ञानिकों और डॉक्टरों को नहीं पता।

डॉक्टर से पूछ लो बच्चा बनता कैसे है? रज और बीज जब इकट्ठा हो जाता है तो बच्चा बनता है। अब आप यह समझो कि मुर्गी का अंडा बनता कैसे है? माताएं जब मासिक होती है, उनका खराब खून जब इकट्ठा हो जाता है तो बच्चा बनता है। और मुर्गियों का मल और मूत्र जब इकट्ठा होता है तो अंडा बन जाता है। यह मनुष्य शरीर जो मिला है यह पांच तत्वों से बना है। संयम-नियम का पालन करना जरूरी होता है। जब भी भूख लगे खाओ तो एक रोटी का भूख रखकर के खाओ। शाकाहारी भोजन खाओ ताकि खून बेमेल न होने पावे वर्ना बीमारी बढ़ जाएगी।

खून बेमेल कैसे होता है?

जैसे कोई बीमार हो गया, डॉक्टर के पास ले गए। डॉक्टर ने कहा खून की कमी हो गई है। बाप ने कहा मेरा खून चढ़ा दीजिए, भाई ने कहा मेरा खून चढ़ा दीजिए, डॉक्टर ने टेस्ट किया। कहा भाई का, बाप का खून नहीं चढ़ सकता। क्यों नहीं चढ़ सकता? कि खून मेल नहीं खा रहा। आप यह सोचो कि एक ही मां के दोनों बेटे, एक ही मां के पेट में पले, एक ही मां का दूध पिया, लेकिन खून नहीं मिल रहा। कारण? एक शाकाहारी और एक मांसाहारी। शाकाहारी का खून अलग रहता है और मांसाहारी का खून अलग रहता।

मांसाहार की वजह से लोगों की बुद्धि खराब हो रही है

महाराज जी ने कहा कि मांसाहार की वजह से लोगों को क्रोध ज्यादा बढ़ रहा है। मांसाहार की वजह से खून में तेजी आ जाती है कहते हैं कि ब्लड प्रेशर हाई हो रहा है, दिमाग काम नहीं कर रहा है, बुद्धि काम नहीं करती है। बुद्धि तो शरीर के साथ जुड़ी है। इसलिए मांस नहीं खाना चाहिए।

आदमी स्वास्थ्य तभी रह सकता है जब वो शाकाहारी भोजन करे

महाराज जी ने कहा आदमी स्वस्थ तभी रह सकता है जब शाकाहारी भोजन करें, संयम-नियम का पालन करें, एक रोटी की भूख रख कर ही खाए। इस को स्वस्थ रखने के लिए खानपान का ध्यान रखो।
जय गुरु देव