पुत्र के दिर्घाऊ होने की कामना के साथ की हरछठ पूजा

यूपी फाइट टाइम्स
ठा. अनीष सिंह

किशनपुर- रविवार को हरछठ पूजा मनाई गई।पुत्र के दीर्घायु होने की कामना के साथ महिलाओं ने पूजा अर्चना किया। इस पर्व पर महिलाओं द्वारा अपने पुत्रों की दीर्घायु के लिए व्रत रखा गया। इसके अलावा जौ,चना,गेहूं,धान,अरहर,मक्का व मूंग आदि सात प्रकार के भुने हुए अनाजों को भूनकर मिट्टी व चीनी से बने कुंडों में भरकर झरबिरिया की डाली व कुश,ढाक के पत्तों से पूजा की गई।

कोरोना वैश्विक महामारी के कारण गावों मे यह पर्व विधि विधान से घरो मे मनाया गया।भार भूनने वालो के यहा सुबह से ही अनाज भुनाने के लिये लोग आते जाते रहे।अनाज भूनने मे भी संक्रमण को देखते हुये विशेष सावधानी बरती गई।इसके साथ ही हलछठी पर पूजन अर्चन किया गया।
हलषष्ठी का व्रत श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी के जन्म के उपलक्ष्य में भी मनाया जाता है।धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्री कृष्ण के जन्म से दो तिथि पूर्व भाद्रपद के कृष्णपक्ष की षष्ठी को उनके भाई बलराम जी का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन भी व्रत और पूजा करने की परंपरा है। हलषष्ठी का व्रत विशेषकर पुत्रवती महिलाएं करती हैं। यह पर्व हलषष्ठी, हलछठ , हरछठ व्रत, चंदन छठ, तिनछठी, तिन्नी छठ, ललही छठ, कमर छठ, या खमर छठ के नामों से भी जाना जाता है। यह व्रत महिलाएं अपने पुत्र की दीर्घायु और उनकी सम्पन्नता के लिए करती हैं। माताएं व्रत पूजन के साथ ही अपनी संतान की दीर्घायु की कामना करती हैं। इस दिन हल की पूजा का विशेष महत्व है। चूंकि भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम का अस्त्र हल था जिस कारण महिलाएं इस दिन हल का पूजन करती हैं। महिलाएं अपने पुत्र की सलामती के लिए निर्जल व्रत रखती हैं।