किसान भाई  इस  समय अपने खेत की सतत् निगरानी करते हुये रोग दिखने पर अपने नजदीकी कृषि रक्षा इकाई पर संपर्क करें-जिला कृषि रक्षा अधिकारी

संवाददाता राधेश्याम गुप्ता

अथवा सहभागी फसल निगरानी एवं नियंत्रण प्रणाली के व्हाट्सएप नम्बर-9452247111 या 9452257111 पर इसकी सूचना तत्काल देकर समाधान/सलाह प्राप्त करें।

दिनांक 05 सितम्बर, 2020

बलरामपुर। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि जनपद में धान एक प्रमुख खाद्यान्न फसल है। वर्तमान मौसम के दृष्टिगत धान में कीट/रोग के प्रकोप की संभावना है। जिसका रोकथाम करना अति आवश्यक है। इन सामयिक कीट/रोगों की पहचान कर इनसे होने वाली क्षति से बचाव हेतु सुझाव एवं संस्तुतियों की एडवाइजरी जारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसान भाई अपने फसलों का विशेष ध्यान दें।

पत्ती लपेटक कीट की सूड़ियां पहले पीले रंग की तथा बाद में हरे रंग की हो जाती है। जो पत्तियों को लम्बाई में मोड़कर अन्दर से उसके हरे भाग को खुरच कर खा जाती है। इस कीट के निंयत्रण हेतु क्यूनालफाॅस 25 प्रति ई0सी0 125 ली0 प्रति हेक्टेयर, ट्राइजोफास 40 प्रति ई0सी0 1.25 ली0 प्रति हेक्टेयर की दर से 500-600 ली0 पानी में मिलाकर छिड़काव करायें।

गालमिज कीट की सूड़ी गोभ के अन्दर तने को प्रभावित कर प्याज के तने के आकार की रचना कर देती है। जिसे सिल्वर शूट या ओनियन शूट कहते है। ऐसे ग्रसित पोधे में बाली नहीं बनती है। इसके नियंत्रण हेतु कार्बोफ्यूराॅन 3 जी 20 किग्रा0 अथवा फिप्रोनिल 0.3 प्रति 20 किग्रा0 प्रति हेक्टेयर 3-5 सेमी0 स्थिर पानी में प्रयोग करना चाहिए। तना बेधक कीट की मादा पत्तियों पर समूह में अण्डा देती हैं अण्डों से सूड़ियां निकल कर तनों में घुस कर मुख्य तना को क्षति पहुॅचाती है। जिससे बढ़वार की स्थिति में मृत गोभ दिखाई देता है। इसके नियंत्रण हेतु कार्बोफ्यूराॅन 3 प्रति 20 किग्रा0 अथवा कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 4 प्रति0जी0आर0 की 18 किग्रा मात्रा 3-5 सेमी0 पानी में प्रयोग करें।

हरा फुदका कीट प्रौढ़ हरे रंग के होते है तथा इनके उत्तरी पत्तों के दोनों किनारों पर काले बिन्दु पाये जाते है। इस कीट के शिशु एवं प्रौढ़ दोनो ही पत्तियों से रस चूसते है। इनके नियंत्रण हेतु फिप्रोनिल 0.3 प्रति एस0एल0 की 50 मिली0 मात्रा को 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

भूरा फुदका कीट के प्रौढ़ भूरे रंग के पंखयुक्त तथा शिशु पंखहीन होते है। इस कीट के शिशु एवं प्रौढ़ दोनो ही पत्तियों एवं किल्लों के मध्य रस चूस कर क्षति पहुँचाते है। इसके प्रकोप पर खेत से तत्काल पानी बाहर निकाल देना चाहिए। यूरिया की टाप ड्रेसिंग रोक देनी चाहिए। इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस0एल0 की 125 मिली0 या डब्ल्यू0जी0 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर 500 ली0 पानी में मिलाकर तत्काल छिड़काव कराना चाहिए। इस कीट के दिखने पर लापरवाही कतई न करें, अन्यथा 48 घण्टे के अन्दर ही फसल चैपट हो जाती है।

गन्धी बग कीट के प्रौढ़ एवं शिशु लम्बी टांगों वाले भूरे रंग के विशेष गंध वाले होते है। ये बालियों की दुग्धवस्था में दानों में बन रहे दूध को चूस लम्बी टांगों वाले भूरे रंग के विशेष गंध वाले होते है। ये बालियों की दुग्धावस्था में दानों में बन रहे दूध को चूस जाते है। इसके नियंत्रण हेतु फेनवेलरेट .04 प्रति धूल या मैलाथियान धूल 5 प्रति डी0पी0 या कोई अन्य पाउडर 20-25 किग्रा0 प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें।

जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने कृषक बन्धुओं को सलाह दिया है कि इस समय अपने खेत की सतत् निगरानी करते हुये रोग दिखने पर अपने नजदीकी कृषि रक्षा इकाई पर संपर्क करें अथवा सहभागी फसल निगरानी एवं नियंत्रण प्रणाली के व्हाट्सएप नम्बर-9452247111 या 9452257111 पर इसकी सूचना तत्काल देकर समाधान/सलाह प्राप्त करें।