You are currently viewing FATEHPUR-  ऑनलाइन कविताओं के माध्यम से युवा लोगों को कर रहे जागरूक


जहानाबाद/फतेहपुर
लाॅक डाउन में कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जहां कवि अपने शब्दों से कोरोना पर वार कर लोगों को सर्तक रहने का संदेश दे रहे हैं। वही कुछ लोग जो कवि नहीं है। वे घर बैठे अपने शब्दों को कविता रुपी माला में पिरोने का प्रयास कर रहे हैं। इसके तहत अमौली ब्लाक के बसफरा गांव निवासिनी दिपांशी तिवारी व कानपुर की मसहूर जागरण सिंगर लिखतीं हैं।
घर के भीतर ही रहौ, करौ किवाडे़ बंद।तब ही छूटै आपको, कोरोना से फंद।।
कोरोना से फंद, निकलकर मत बाहर जाओ। बाहर जाओ तो तुम, मुंह पर मास्क लगाओ।।
बार-बार साबुन से तुम हाथों को धोना। नहीं मानौ गे बात तो आ जावेगा कोरोना।।
सेनेटाइजर डाल कै, रखिए घर को साफ। कोरोना तब ही तुम्हें कर पावेगौ माफ़।।
कर पावेगौ माफ़, फलो को घुल कर खाऔ।करो नमस्ते मत किसी से हाथ मिलाऔ।।
शिवम् भाई सही तुमको यह बात बतावै। जो नहीं मानै बात तो वह पिछे पछतावै।।
अंकित भारतीय लिखते हैं-
कोरोना के कहर से विश्व़ हुआ भयभीत।भूल गए रस-रंग सब छंद सबैया गीत‌‌।।
कोरोना से ग्रस्त जग, चहुं दिश हाहाकार। कैद भैय घर में सबही, त्याग लोक त्योहार।।
भोजन के लाले पड़े,सबको कियो तवाह। धंधे चौपट हो गए, कौन करे परवाह?
चर्चा सुन ब्याकुल सभी, जीने की नहीं आस, दूर भएं सब लोग अब,कोऊ न आवैं पास।।
अपर्णा तिवारी लिखती हैं-
बदल गई जीवन की शैली, रोग कोरोना आया है।मौन खड़ी तकनीक आज़, सबने अपरस अपनाया है।। ‌
बड़ी गज़ब निराली है गाथा अपने इस हिंदुस्तान की। भारत की संजीवनी से रक्षा होगी विश्व़ महान की।
हम सब संयम बरतेंगे तों,कोरोना ही हारेगा। इस विश्व़ पलट पर फिर गूंजेगी जय अपने हिंदुस्तान की।।
शारीरिक दूरी हों पर मन में कोई दूर न हो, हम सब सबका ध्यान रखेंगे कोई भी मजबूर न हो।।
ये अपनी घरती फिर महकेगी जो की है वरदान की।
विश्व़ पलट पर फिर गूंजेगी जय अपने हिंदुस्तान की।।
भागवताचार्य कौशल तिवारी लिखते हैं – जाग उठो और कमर कसो, मंजिल की राह बुलाती है।
जीवन है अनमोल बचाओ चीनी जैविक हथियारों से, कराह रही सारी दुनिया, ये बुरी तरह घबराती है। इस छुआछूत बढ़ने वाली कुरौना वायरस महामारी से अब सबकी जान बचानी है।
पाप छोड़कर सब धर्म करो, सब निर्धन जन की सेवा, करके घर घर में ज्योती जलानी है। पापों की गठरी लादे प्यारे, धर्म-कर्म को भूल गया तू, धन दौलत पड़ी रह जानी है, सोना चांदी साथ न जाए, बेटा बेटी और महल दुम्हले सब यहीं खड़े रह जाने हैं।
मास्क लगाकर रहना होगा जीवन है अनमोल बचाओ, अब सबकी जान बचानी है अभी संभल जा मूरख बंदे, भज ले हरि को छोड़ के धंधे।
अब जल्दी होय रवानी है, गर्म पानी कड़ा पीकर, शिव भक्तों को भज ले घर में बच जाएगी यह जिंदगानी, क्या भरोसा है इस जिंदगी का साथ देती नहीं है किसी का, नाम ले ले प्रभु का अनमोल।