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किशनपुर क्रय केंद्र में अभी भी जमीन में सड़ रहा खरीद किया हुआ गेंहू

यूपी फाइट टाइम्स
ठा. अनीष सिंह

फतेहपुर (ब्यूरो)-किशनपुर क्रय केंद्र पर खरीद का समय समाप्त होने के बाद भी परिस्थितियां सुधरने का नाम नहीं ले रही है और किसानो कि मेहनत पानी पानी हो रही है और हजारों कुंतल गेहूं केंद्र परिसर में पढ़ा अभी भी सड़ रहा है हालात इतने बदतर हैं कि ना तो यहां पर तिरपाल की व्यवस्था है और ना ही गेहूं को अंदर रहने रखने की कोई व्यवस्था है ।
मामला फतेहपुर जनपद के किशनपुर क्रय केंद्र का है जहां किसानों को तौल के लिए समस्याओं का सामना करना पड़ा जैसे तैसे कुछ किसानों की तौल हो गई तो कुछ किसानों के गेहूं ट्रैक्टर ट्राली पर ही खड़े खड़े दोबारा से उग आए और उनकी फसल ट्रैक्टर ट्राली में ही तैयार हो गई लेकिन यह सारा खेल बिचौलियों के चलते हुआ जिन्होंने केंद्र प्रभारी व कर्मचारियों को दौलत का प्रसाद चढ़ा दिया उसकी तो तौल हो गई लेकिन जिसके पास चढ़ावा नहीं था उसका गेहूं ट्रैक्टर ट्राली में ही खड़े-खड़े ही उग आया और यह सब सत्ता के लम्बरदारो की बेरुखी के चलते हुआ अगर सत्ता के लंबरदारों ने अपने कुर्सी पर बैठे इन कर्मचारियों व अधिकारियों की नकेल कसी होती तो आज हालात ऐसे नहीं होते लेकिन अब सवाल यहां पर यह उठता है कि क्या भीगा हुआ गेहूं सरकारी गोदामों में जाएगा या फिर यहीं पर ही इस की अदला बदली कर दी जाएगी वहीं सूत्रों की माने तो जो खरीद किया हुआ गेहूं भीग गया है उसे एफसीआई गोदाम में जमा कर वहां से फ्रेस गेहूं निकालकर लोडिंग करवाया जाता है लेकिन सबसे बड़ा बिन्दु यह भी यहां पर यह उठता है कि क्या जो गेहूं बरसात के पानी में भीग कर खराब हो गया उसकी भरपाई कौन करेगा और इसका जिम्मेदार आखिर कौन होगा जब पड़ताल के लिए मीडिया के लोग मंडी परिसर में जाकर पहुंचे तो देखा कि मंडी परिसर पर ना तो गेहूं रखने की जगह है और ना ही बरसात से गेहूं को बचाने के लिए कोई तिरपाल की व्यवस्था किसानों के तिरपाल के सहारे ही आज भी गेहूं वहां पर पड़ा हुआ है बोरिया सड चुकी हैं गेहूं दोबारा से उग आया है और सबसे बड़ी बात देखने को यह मिली कि जो गेहूं भीगा हुआ है उसे ट्रैक्टर में लादकर बगल के ही एफसीआई गोदाम में ले जाकर पलटी किया जाता है और वहां से फ्रेस गेहूं की बोरियां बदलकर उनको उठान के लिए भेजा जाता है वहीं सूत्रों की माने तो जो खराब गेहूं गोदाम में रखा जाता है उसे कोटेदारों को दिए जाने के बाद वाले अनाज पर थोड़ा-थोड़ा करके पूर्ति कराई जाती है पर जितना भी यह सारा खेल हुआ सब लम्बरदारो की बेरुखी के चलते हुआ अगर लंबरदारों ने नकेल कसी होती तो शायद आज हालात ऐसे नहीं होते
इस मामले पर जब केंद्र प्रभारी किशनपुर से बात की गई तो उन्होंने दबी जुबान बयान देते हुए कहा कि गेहूं सुखवाने के लिए गोदाम में ले जाया जाता है,उसके सूखने के बाद उसको फिर से उठान करवाया जाता है,
हलाकि जब इस मामले की जानकारी के लिए उपजिलाधिकारी खागा के पास सम्पर्क किया गया तो, उनका फोन नही लगा,