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कौशाम्बी

ब्यूरो चीफ आर पी यादव

भाई की दीर्घायु के लिए मनाया जाता है ढेंढिया का त्योहार

कौशाम्बी द्वाबा क्षेत्र के कौशाम्बी प्रयागराज फतेहपुर में ढेंढिया का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है इस त्योहार में बहने अपने भाइयों की मंगल कामना के लिए ढेंढिया में दीपक रखकर भाई की नजर उतारती हैं तत्पश्चात गली चौराहे पर उसे फेंक दिया जाता है।
हलांकि अब यह त्योहार धीरे धीरे कमजोर हो रहा है बीते दशकों पहले इस त्योहार की तैयारी ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियां और महिलाएं हफ्तों पहले शुरू कर देती थीं शाम को मुहल्ले की महिलाये लडकिया झुंड बनाकर सिर पर ढेंढिया मटके आदि लेकर गोला बनाकर चारों तरफ खड़े होकर एक महिला बीच मे खड़ी होकर तरह के ढेंढिया नृत्य और गीत गाती थीं उन गीतों में तमाम तरह भजन और प्रकृति के संदेश होते थे।महिलाए पुलुलुवा,तरह तरह के रूप बनाकर अपने उसी क्षेत्र स्थल पर धमाल मचाती थीं क्या बच्चे बूढ़े जवान उन धमाल का प्रेम पूर्वक शिकार भी होते थे।
टेक्नोलॉजी के जमाने ने इस ढेंढिया और रात में महिलाओं लड़कियों द्वारा होने वाले इन क्रियाओं खेल को छीन लिया बिलुप्त हो गए कोरोना का संक्रमण ने सभी को अंकेले रहने पर मजबूर कर दिया लाई गट्टा चीनी के बने विभिन्न प्रकार की मिठाईयां घोड़े हाथी तिल की बनी मिठाइयों को बेचने वाले दुकानदारों का धंधा भी न के बराबर रह गया है ।