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जयगुरुदेव

05.04.2021, उज्जैन (म.प्र)

सन्त न होते तो दिल्ली ख़त्म हो गई होती, सम्भाल करने के लिए सन्त रहते हैं -बाबा उमाकान्त जी महाराज

कोरोना से भी खतरनाक बीमारियों के आने के संकेत देने वाले व उनसे लोगों को बचने के उपाय बताने वाले वर्तमान के पूरे सन्त सतगुरु बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 29 मार्च 2021 को अपने उज्जैन आश्रम से सतसंग सुनाते हुए बताया कि देखो प्रेमियों जिस जगह से अच्छा काम होता है वह जगह जग जाती है। जहां पर मारकाट होने लगता है, मारकाट का नियम कानून बनने लगता है, जीव हत्या का कानून बनने लगता है, वह जगह गंदी हो जाती है।

दिल्ली हमेशा राज करने वालों की ही रही है

महाराज जी ने बताया कि दिल्ली हमेशा राज करने वालों की ही जगह रही है। सन्त तो रहे हैं। सन्त न होते तो दिल्ली खत्म हो गई होती। हमेशा रहे हैं, सन्तो का स्थान रहा है, पूरे फकीरों का रहा है। संभाल करने के लिए रहते रहे हैं। इसीलिए सम्भली रही है। तो स्थान का इतना असर होता है।

प्रेमियों!अच्छे का साथ करोगे अच्छाई आयेगी, बुरे का साथ करोगे बुराई आयेगी

प्रेमियों संग का दोष कितना होता है? उसका कितना असर पड़ता है? कहते है बुरे का संग करोगे तो बुराई आने में देर नहीं लगेगी। यह मन उधर चला जाएगा, बुराई की तरफ चला जाएगा, अपराध की तरफ चला जाएगा। इसलिए बुरे का साथ मत करो।

श्रवण कुमार की कहानी, भूमि का कितना बड़ा असर होता है

महाराज जी ने बताया कि श्रवण कुमार माता-पिता की सेवा करते थे। उनके माता-पिता अंधे थे। एक बार इच्छा हुई कि हम को भी ले चलो चारों धाम। हम भी तीर्थ करें तो सरवण कुमार ने कांवड़ बनाया और पैदल जा-जा करके तीर्थ स्थानों में लाभ दिलाया। घूमते हुए जब इधर दिल्ली पहुंचे तो श्रवण कुमार का दिमाग गर्म हो गया। बोले पैदल चलते-चलते थक गया। तुमने तो मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी, जवानी बर्बाद हो गई उनके पिता समझ गए बात तो कुछ जरूर है। वही बेटा जो हमको भगवान की तरह मानता था अब ऐसा कह रहा है। पूछा बेटा इस समय कहां पर हो? बोला दिल्ली में। बोले कि हमको उधर ले चलो, दिल्ली के बाहर। हमको वहीं उतार देना, वहीं पर हम मांग-खा लेंगे, अपना जीवन गुजार देंगे। तुम कमाओ-खाओ, शादी-ब्याह करो, बाल-बच्चे पैदा करो। तुमने हमारी बहुत सेवा करी। अब वहां से जब गया और ब्रज भूमि पर पहुंचा फिर सुस्ताने के लिए जब पेड़ की छाया में उतारा तो पूछा कि अच्छा बेटा कहां पर हो? बताया दिल्ली के बाहर ब्रज भूमि पर। तो बोला बेटा आप हमको छोड़ दो। श्रवण कुमार बोले आप को कैसे छोड़ सकता हूँ? आप तो मेरे भगवान हो? आप जब दुनिया से जाओगे तब साथ छूटेगा या मैं जाऊंगा तब साथ छूटेगा। नहीं तो जब तक आप रहोगे मैं रहूंगा, मैं आपकी सेवा करता रहूंगा। सरवन कुमार की मां ने पूछा वहां पर इसको क्या हो गया था। उन्होंने कहा भूमि का असर हो गया था, जमीन का असर हो गया था।