कौशाम्बी के हिन्दू परिवारों में भी मनाया जाता है इमाम हुसैन का गम हर साल रखी जाती है ताजिया

ब्यूरो चीफ आर पी यादव

कौशाम्बी;-कौशांबी जिले में एक गांव ऐसा भी है, जहां हिंदू परिवार के साथ कई गांव के हिन्दू परिवार के लोग पूरी सिद्दत से मुहर्रम का पर्व मनाते है। गांव का हर इंसान पूरी इबादत से मुहर्रम में अपने परिवार के साथ ताजियादारी करता है। यह परंपरा पिछले 200 सालों से गांव में कायम है। यहां रहते है सैकड़ो हिंदू परिवार।कौशांबी के मोहब्बतपुर जीता गांव की तरफ जाने वाली सड़क इमामे हुसैन की सदाओं में डूबी रहती है
जहां नफरत और मजहब की दीवार दरवाजे पर पहुंचते ही दम तोड़ देती है।

  • यह तस्वीर इस बात की गवाह है हिन्दू परिवार जिस तरह पूरी सिद्दत से अपने त्यौहार मनाता है। उसी आदर और सत्कार से मुहर्रम में ताजियादारी भी करता है।
  • यहां का हर इंसान अपने परिवार साथ ताजिया को सम्मान के साथ रख इबादत करता है।बताया जाता है कि इस गांव में अंग्रेजी हुकूमत के समय में पानी को लेकर झगड़ा हुआ था जिसमे कई लोग मारे गये थे।
  • इसमे हिन्दू परिवार के कुछ लोगो को अंग्रेज सरकार ने फांसी की सजा सुनाई थी, जिससे पुरे गांव में हड़कम्प मच गया था।
    जेल जाते समय ताजिया रास्ते मे मिलने पर इमाम हुसैन से दुआ मांगी की हमारी फांसी की सजा से अगर बच गए तो वह हर साल पूरी सिद्दत और परंपरा से अजादारी और ताजियादारी करेंगे। दुआ कबूल हुई फांसी से बच गये और जिसका नतीजा है कि आज भी मोहब्बत पुर जीता गांव में हिन्दू परिवार के सैकड़ो लोग मुहर्रम का पर्व पूरी शिद्दत से मनाते है